सिया राम के अतिशय प्यारे, अंजनिसूत मारुती दुलारे,
श्री हनुमान जी महाराज
के दासानुदास श्री राम परिवार द्वारा
पिछले अर्ध शतक से अनवरत प्रस्तुत यह

हनुमान चालीसा

बार बार सुनिए , साथ में गाइए ,
हनुमत कृपा पाइए .

[शब्द एवं धुन यहीं उपलब्ध हैं]

प्रार्थी - "भोला" [ श्री राम परिवार का एक नगण्य सदस्य ]




आज का आलेख

शनिवार, 15 मई 2010

Who Am "I" ? ( II )

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While pondering over the current topic ie. Who am I? , we came across a couple of  English verses (Kirtan) capsuling the answer to this question. These verses were composed by none else but the greatest vedantik thinker of Bharat during the mid twentieth century Sri Swami Sivananda Ji.who used to pass on  his wisdom  to  followers through HIS compositions dovetailing highest philosophic truths and sublime spiritual lessons ..

THE SONG OF ADWAITA .

Who am "I"?

Soham Soham Soham Soham

OM OM OM OM OM =OM OM OM OM OM

I am neither MIND nor BODY = IMMORTAL SELF I am

I am witness of the three states = EXISTENCE Absolute

I am witness of the three states = KNOWLEDGE Absolute

I am witness of the three states = BLISS Absolute

Nothing exists = Nothing belongs to me.

OM OM OM OM OM = OM OM OM OM OM

I am not this BODY======== This BODY is not MINE

I am not this PRANA ====== This PRANA is not MINE

I am not this MIND ======= This MIND is not MINE

I am not this BUDDHI ======This BUDDHI is not MINE

I am THAT ,I am THAT ,I am THAT, I am THAT

SOHAM SOHAM SOHAM SOHAM SOHAM

I am SATCHIT =========== ANAND SWAROOP

I am NITYA SHUDDHA BUDDHA + MUKTA SWABHAV

I am SWAYAM PRAKASH ===== I AM SHANTI SWAROOP

I am AKARTA ============ I AM ABHOKTA

I am ASANG ============ I AM SAAKSHII

SOHAM SOHAM SOHAM SOHAM SOHAM

===========================================================

The ESSENCE of VEDANTA
as drawn by Swami Sivananda ji :-

Enquire "Who am I "
Know thy SELF and be Free. 
Be Still be Quiet Know Thy Self

Find the HEARER ,
Find the SEER,
Find the KNOWER.

You are not this BODY, 
not this MIND ,
IMMORTAL SELF YOU ARE


from the autographed book of bhajans
presented by Swami Ji to Dr. Krishna Bhola Shrivastav in 1953

2 टिप्‍पणियां:

  1. 'मैं कौन हूँ' विषय को मैंने २-३ बार इस पढ़ा - मेरा अनुरोध है की इस अहंम विषय का स्पष्टीकरण दृष्टान्तों द्वारा दिया जाए - अति अति धन्यवाद् ,विनीत - सुभाष मैहता

    उत्तर देंहटाएं
  2. स्नेही सुभाष जी ,धन्यवाद , कमेन्ट के लिए आभारी हूँ ! हमारे-आपके जीवन के प्रत्येक क्षण इन सूत्रों के द्रष्टान्त उपस्थित करते हैं ! हमें पल पल इनका अनुभव होता हैं ! अहंकार के कारण हम अपने इस शरीर को "मैं" की संज्ञा दे देते हैं !
    मेरे जीवन में इस परम सत्य का अनुभव श्री श्री माँ आनंदमयी के सन्मुख बिताए कुछ क्षणों में हुआ ! मेरे पिछले आलेखों में इसका ज़िक्र है ! --"भोला"

    उत्तर देंहटाएं

महावीर बिनवउँ हनुमाना ब्लॉग खोजें

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