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आज का आलेख

मंगलवार, 13 जुलाई 2010

श्रीश्री माँ आनंदमयी क़ी कृपा

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श्रीश्री माँ आनंदमयी क़ी कृपा 

गतांक से आगे

काफी देर तक ह्म ,बड़ी बेताबी से ,माँ के उस खचाखच भरे पंडाल में प्रवेश पाने का प्रयास करते रहे.पर बैठने की कौन कहे कहीं खड़े होने की जगह भी नहीं मिली. उस समय मेरे मन के किसी अँधेरे कोने में इस आशा क़ी ज्योति टिमटिमा रही थी  क़ी शायद माँ का कोई प्रभावशाली भक्त, जो एक्सपोर्टर भी हो और कभी मेरी सरकारी सेवा से लाभान्वित हुआ हो , मुझे पहचान ले और मेरी सेवाओं के लिए मुझे अब पुरुस्कृत करे और मेरे पूरे परिवार को उस पंडाल में बैठने के लिए थोड़ी सी जगह दिलवा दे . पर ऐसा लगा जैसे  मेरे प्यारे प्रभु की जुगाड़ी योजना में आज हमे यह मामूली सी सुविधा दिलाने का भी प्रावधान, नही था. प्रियजन,देखा आपने,उनकी कृपा बिना मानव कितना असहाय हो जाता है, उस आपाधापी में मेरे ज़हेन में  बहादुरशाह ज़फर का यह मशहूर कलाम ,बार बार गूँज रहा था :- 
इतना  हूँ बदनसीब ज़फर दफन के लिए   दो गज ज़मीन भी न मिली कूए यार में.

लेकिन जैसा ह्म सब जानते-मानते हैं क़ी "भगवान के घर देर है अंधेर नहीं है",हुआ ऐसा क़ी माँ के आगमन के १५-२० मिनट पहले ही हमारे प्यारे प्रभु को ह्म सब पर बहुत दया आयी और उन्होंने ह्म पर अति करुना कर के अपना चमत्कार  दिखा ही दिया.  कैसे?  मैने स्वयम देखा और सुना, माँ के मुम्बई आश्रम के एक संन्यासी ,अति चिंतित स्वर में , माँ के प्रमुख अनुयायी स्वामी निर्मलानंद  जी से क़ह रहे थे  " सुधा जी आर सुलाक्ष्ना जी को आज माँ के आगे  भजन गाना था किन्तु ,दोनों का फोन, अभी अभी आया क़ी वो आज नही आ पाएंगी. भीषण चिंता का विषय है, माँ का  पंडाल में आने का समय हो गया. अब क्या बंदोबस्त हो सकता है. बूझोते पारी ना." तभी एक आवाज़ और सुनाई दी "स्वामी जी चिंता कोरून ना,आज के एयी नोतून लोग के गावाना .बेश भालो गान कोरें लोक ता ,आज माँ को इनके भजन सुनवाइए , हमने इनका भजन बिरला मातुश्री, और भूलाभाई  देसाई  ऑडिटोरियम में स्वामी अखंडानंद जी के सामने  सुना है.बहुत सुंदर हरि कीर्तन करता   है ये पूरा चन्द्रा-श्रीवास्तव परिवार "  प्रियजन ह्म नहीं जानते  क़ी वह व्यक्ति  कौन थे जिन्होंने हमारा यह (भजनीकी )परिचय स्वामी निर्मलानंद जी को दिया था पर हमे यह पूरा विश्वास है क़ी उस व्यक्ति से मेरा कोई ओफिसिअल कनेक्शन नहीं था.  

इसके बाद क्या हुआ ,हमारी साढ़ेसाती तो महावीर विक्रम बजरंगी क़ी अपार कृपा से तत्क्षण ही क्ट गयी.आगे का हाल कल बताउंगा.

निवेदक: व्ही .एन.  श्रीवास्तव "भोला" 

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