सिया राम के अतिशय प्यारे, अंजनिसूत मारुती दुलारे,
श्री हनुमान जी महाराज
के दासानुदास श्री राम परिवार द्वारा
पिछले अर्ध शतक से अनवरत प्रस्तुत यह

हनुमान चालीसा

बार बार सुनिए , साथ में गाइए ,
हनुमत कृपा पाइए .

[शब्द एवं धुन यहीं उपलब्ध हैं]

प्रार्थी - "भोला" [ श्री राम परिवार का एक नगण्य सदस्य ]




आज का आलेख

शनिवार, 10 जुलाई 2010

SRI MAA ANANDAMAYIs GRACE

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श्रीश्री माँ आनंदमयी कृपा 
मिज अनुभव 
गतांक से आगे

प्रियजन .एकमात्र मेरा ही नहीं   यह असंख्य साधकों का अनुभव है क़ी जब हम किसी सिद्ध आत्मा का प्रवचन सुनने जाते हैं,उस समय हमारे मन में जो जो शंकाएं होती हैं हमें   उनका कुछ न कुछ समाधान उस प्रवचन  में अवश्य मिल जाता है.(निश्चय ही वह सिद्ध     आत्मा केवल आपकी सार्थक शंकाओं को ही स्पर्श करता है). 

माँ के उस दिन के प्रवचन में ,उन्होंने जब वह सवाल पूछा क़ी "पिताजी, केनो भूल होए ना?"How and why we do not commit mistakes,despite the big rush of work load? उस समय मैं ऎसी स्तिथि में था क़ी यह समझ ही न पाया क़ी वह प्रश्न मुझसे किया गया था.  तब मैं  किसी अन्य संसार में विचरण कर रहा था ,कुछ पल पहले माँ के अनुपम स्वरूप का दर्शन करके जो मेरी आँखे बंद हुईं लगभग एक घंटे तक वो खुली ही नहीं.

प्रियजन. यह न सोंचें क़ी भोला जी समाधिस्थ  हो गये थे . भैया जिसे ध्यान कहते हैं वो तो आज तक  मुझसे लगा ही नहीं ,फिर समाधि कैसे लगती? पर उस समय की मेरी स्थिति अतिशय आनंद की थी. सारा शरीर रोमांचित था, बंद आँखों से झर झर आंसू बह रहे थे, कंठ-वाणी पूरी तरह अवरुद्ध थी.  परमप्रिय स्वजनों मैं यह बात  किसी अहंकारवश नहीं क़ह रहा हूँ . ये बात तो सारा संसार जानता है क़ी मैं एक अति साधारण गृहस्थ हूँ, मैंने अपना पूरा जीवन केवल गुरुजनों की मेहर/कृपा और आशीर्वाद के सहारे जिया हूँ.

गुरुजन  की अपार कृपा की सत्य कथाएँ आपको बताने के लिए ही मैंने यह लेखमाला शुरू की है. प्रियजन माँ से मैं दीक्षित नहीं हूँ. माँ (जननी)क्या ओपचारिकता से दीक्षा देती है? वह तो शिशु के जन्म से, जब तक वह जीवित रहती है तब तक, हर घड़ी अपने बच्चों को कुछ न कुछ सिखाती ही रहती है.वैसी ही दूसरी जननी हैं माँ आनंदमयी हमारी......कहानी आगे बढाते हुए अब बताऊँ क्यों और कैसे मुझे,इस का पूरा विश्वास हो गया क़ी माँ ने उस शाम का पूरा प्रवचन केवल मेरे लिए -(एक ऐसे व्यक्ति के लिए जिससे वह आज तक कभी मिलीं भी नही थीं)  ,केवल मेरा मार्ग दर्शन करने के  लिए ही दिया था. सुनिए.  पर  
आज नहीं कल सुनाऊंगा. आज इतना ही.

निवेदक:  व्ही. एन. श्रीवास्तव "भोला"

1 टिप्पणी:

  1. बहुत ही अच्छी पोस्ट है ,खुशकिस्मत होते हाउ वो लोग जिन्हें इतने पहुचे हुए लोगो को जान्ने का मौका मिलता है,आप आगे भी उन के बारे में लिखते रहें...शुक्रिया...

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