सिया राम के अतिशय प्यारे, अंजनिसूत मारुती दुलारे,
श्री हनुमान जी महाराज
के दासानुदास श्री राम परिवार द्वारा
पिछले अर्ध शतक से अनवरत प्रस्तुत यह

हनुमान चालीसा

बार बार सुनिए , साथ में गाइए ,
हनुमत कृपा पाइए .

[शब्द एवं धुन यहीं उपलब्ध हैं]

प्रार्थी - "भोला" [ श्री राम परिवार का एक नगण्य सदस्य ]




आज का आलेख

बुधवार, 22 सितंबर 2010

JAI JAI JAI KAPISUR(Sep.23,'10)

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सब हनुमत कृपा से ह़ी क्यों ?
गतांक से आगे 

विमान के चालक महोदय ने ट्रेक्टर के हट जाने के बाद जहाज़ के इंजिन चालू करने की दो चार कोशिशे कीं ! उन्हें सफलता मिली केवल इतनी ही क़ि इंजिन से भयंकर चीत्कार के स्वर निकले ,विमान की विशाल काया पहले तो जूडी(मलेरिया) से पीड़ित रोगी के समान कम्पायमान हुई और फिर प्राणहीन पिंजर क़ी  तरह शांत हो गयी ! इधर बाहर बून्दाबून्दी चालू हो गयी थी  ! मौसम पीने पिलाने वाला हो गया !फिर क्या था ,साकी था सागर था पैमाना था मौसम भी था और दीवाने भी थे ! मैखाना चल गया तो चलता ही रहा !

Dear ones ! I did wish to elaborate further on the above BUT it seems HE my इष्ट my LORD does not want that. HE has whispered  in my ears " Sonny! When your own people indulge in such disgraceful acts U have no right to comment on others" 

ठीक ही तो कहा "उन्होंने" ह्म कौन दूध के धुले हैं ? ,ह्म़ारे  सरकारी अधिकारी भी तो ऎसी हरकतें करते हैं. तभी तो स्टेडियम की फाल्स सीलिंग फिक्स होने के साथ ही गिर जाती है "फुटब्रिज" इनागुरेष्ण के कुछ दिन पहले एक लोहे के पिन की कमजोरी के कारण भसक जाता है और उच्चाधिकारी यह कह कर पल्ला झाड लेते हैं क़ी "वो पुल विदेशियों के लिए नही बल्कि भारत के (निरधन और असहाय )नागरिकों के लिए था"(जो अपनी टयोटा वहाँ  पार्क कर के नेहरु स्टेडियम मे प्रवेश करते ,उस दस करोड़ के "फुटब्रिज" पर चल कर) !देखा आपने कितनी मेहरबान है दिल्ली सरकार भारत की गरीब जनता पर ! 

प्रियजन !ये न सोचिये क़ी मैं उपासना से हट कर राजनीति की ओर झुक रहा हूँ.! भाई आप तो जानते ही हैं क़ी मैं स्वयम से ,अपनों से और "सो काल्ड" परायों से भी बराबर प्रेम करता हूं !(कम  से  कम  उसका  नाटक  तो  करता  ही  हूँ ) और  सबसे अधिक मैं अपनी दिवंगत माँ ,गुरुजन और भारत माता को प्यार करता हूँ.! मुझसे नहीं देखा जाता ,मुझे नहीं बर्दास्त होता यह सब ,इससे भडक उठता हूँ कभी कभी ! महापुरुषों ने कहा है क़ी यह भी भक्ति है !सो मैं भक्ति ही कर रहा हूँ !आप भी TRY कर के देखें ,वही मजा आयेगा !

निज अनुभव तो रह ही गया ! अगले अंक मे पढ़ लीजिएगा !
निवेदक:- व्ही, एन. श्रीवास्तव "भोला"

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