सिया राम के अतिशय प्यारे, अंजनिसूत मारुती दुलारे,
श्री हनुमान जी महाराज
के दासानुदास श्री राम परिवार द्वारा
पिछले अर्ध शतक से अनवरत प्रस्तुत यह

हनुमान चालीसा

बार बार सुनिए , साथ में गाइए ,
हनुमत कृपा पाइए .

[शब्द एवं धुन यहीं उपलब्ध हैं]

प्रार्थी - "भोला" [ श्री राम परिवार का एक नगण्य सदस्य ]




आज का आलेख

शनिवार, 9 अक्तूबर 2010

JAI JAI JAI KAPISUR # 1 8 5

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हनुमत कृपा 
निज अनुभव 

प्रियजन आप सब जानते ही हैं क़ि मैं वास्तव में एक निल्कुल साधारण प्राणी हूँ !और मेरे जैसे आम (साधारण) व्यकति का यह claim करना क़ि मैंने, एक M B A को अपने घर में झाडू पोंछा करने के लिए employ कर लिया है, OBVIOUSLY सबको बहुत ही हास्यप्रद लगेगा! सब यही कहेंगे क़ि यह बुड्ढा अब तो बिल्कुल ही पगला गया है! 

यदि कोई स्वाभिमानी M B A मेरा यह ब्लॉग पढ़ रहा होगा, उसने तो मुझे कठघरे में खड़ा करवाने का प्लान अब तक बना ही लिया होगा ! प्लीज़ मेरे स्वजनों मेरी खैरियत के लिए दुआ कीजिए आपकी प्रार्थना सुन कर प्रभु जी उस भयावनी स्थिति में मेरी रक्षा अवश्य ही करेंगे ! देखा आपने मैं अभी भी अपने उसी दिवा-स्वप्न में जी रहा हूँ क़ि परम प्रभु मेरी मदद करने के लिए अपना  क्षीरसागर का luxurious 10 starred comfort छोड़  कर मेरे ताज़े गोबर से लिपे चौके (किचेन) में चटायी पर सोने को राजी हो गये हैं ! आपके गले नहीं उतरी होगी मेरी यह बकवास ? सवाभाविक है इसमें आपका कोई दोष नहीं , मेरी बात ही ऎसी बेतुकी है !

पर मेरे अतिशय प्रिय स्वजनों , पौराणिक काल से ऐसी चमत्कारिक घटनाएँ होती आयी हैं और आज भी यदा कदा एकाध ऎसी घटना सुनने में आती रहती है ! मैं अपने निजी अनुभव तो उनकी सत्यता के पूरे विश्वास के साथ आपको बता ही सकता हूँ!

साधना पथ पर मेरे सहयात्रिओं ! मेरे परिवार में मेरे पूर्वजों को जो ऐसे अनुभव हुए और जिनके DOCUMENTARY  EVIDENCE मैंने स्वयं अपनी इन्ही आँखों से देखे और पढ़े हैं उनपर कैसे अविश्वास करूं? अपनी माँ के तेजोमयी स्वरूप में प्रतिबिम्बित "कृष्ण दर्शनानंद" की मधुर मन मोहक छवि जो मैंने ध्यानावस्थित माँ के मुखारविंद पर बचपन में  देखी थी ,उसे कैसे झूठा कहूं ? आज भी अपनी बड़ी दीदी को समाधि जैसी स्थिति में गुमसुम बैठा देख कर ,अपनी छोटी बहन को गरूडारूढ़ चतुर्भुज श्री विष्णु के साक्षात दर्शन से आत्मविभोर हो घंटों सुध बुध खो कर प्रेमाश्रु बहाते हुये देख कर और अपनी बड़ी भाभी को आनंद विभोर हो गुरुभक्ति एवं कृष्ण प्रेम के मधुर गीत रचते  गाते और सुनाते देख कर मेरा निजी विश्वास दिन पर दिन और दृढ ही हो रहा है!

आदिकालीन भक्तों के ऐसे अनुभव अनेक हैं !आप सब जानते भी होंगे फिर भी उनमे से कुछ कथाएं संक्षेप में कल सुनाऊंगा ! भाई इस बहाने मुझे भी आपके साथ साथ ही अपना भी "विशवास" सुदृढ़ करने का सुअवसर मिल जाएगा !

निवेदक: व्ही. एन. श्रीवास्तव "भोला"

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