सिया राम के अतिशय प्यारे, अंजनिसूत मारुती दुलारे,
श्री हनुमान जी महाराज
के दासानुदास श्री राम परिवार द्वारा
पिछले अर्ध शतक से अनवरत प्रस्तुत यह

हनुमान चालीसा

बार बार सुनिए , साथ में गाइए ,
हनुमत कृपा पाइए .

[शब्द एवं धुन यहीं उपलब्ध हैं]

प्रार्थी - "भोला" [ श्री राम परिवार का एक नगण्य सदस्य ]




आज का आलेख

शुक्रवार, 24 दिसंबर 2010

साधक साधन साधिये # २ ५ ०

Print Friendly and PDF
हनुमत कृपा 
अनुभव               
                                             साधक साधन साधिये 
                                                  साधन (२)


श्रीभगवानुवाच - 

                               "नाहं वेदैर्न तपसा न दानेन न चेजज्या" 
                                              (गीता अध्याय ११, श्लोक ५३)
कुरुक्षेत्र में अर्जुन को अपना दिव्य स्वरूप दिखाकर श्री कृष्ण ने उनसे कहा क़ि " बड़े बड़े तपस्वियों , दानियों, ज्ञानियों और यज्ञ करनेवालों को भी मेरा यह दर्शन दुर्लभ है ! वेद, तप, दान और यज्ञ से मेंरी (ईश्वर-प्रभु की ) प्राप्ति नहीं हो सकती"!                                                          


प्रश्न उठता है क़ि फिर कौन से वे साधन हैं जिन्हें अपना कर जीव सरलता से अपना, अभीष्ट पा सकता है ? गीता में ही इस शंका का समाधान करते हुए श्रीकृष्ण ने अन्यत्र कहा है ! 
श्रीभगवानुवाच --
मन्मना  भव  मद्भक्तो  मद्याजी  मां नमस्कुरु !
मामेवैश्य सि सत्यम ते प्रतिजाने प्रियोअसि मे !! (गीता -अध्.१८ -श्लोक ६५ ) 
श्रीमदभगवत गीता के उपरोक्त श्लोक में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को ईश्वर प्राप्ति के साधन बताते हुए कहा :-
"मन लगा  मुझमे , भजन कर, वंदना कर ,भक्त बन! 
             एक हो जायेंगे ह्म तुम, प्रिय सखा , मैं कर रहा प्रन !! (भोला)        
हे अर्जुन ! मुझमें अपने मन को स्थिर कर , मेरा भक्त बन , भजन और वन्दना कर !  ऐसा कर के तू अवश्य ही मुझे पा जायेगा , मुझमे मिल जायेगा ! मैं प्रण करके कहता हूँ क्योंक़ि तू मुझे अतिशय प्रिय है !)


इस प्रकार श्रीकृष्ण ने अपने प्रिय सखा अर्जुन को भगवत कृपा प्राप्ति के तीन प्रमुख साधन बताये   (१) ध्यान,(२) अर्चन, (३) नाम संकीर्तन .


श्रीमदभागवत पुराण के षष्ठ स्कंध में श्री वेदव्यास नें भी साधकों के लिए "हरि कृपा प्राप्ति " के विविध साधन बताते हुए कहा है क़ि इस जगत में जीवों के लिए यही सबसे बड़ा कर्तव्य है  क़ि वे नाम कीर्तन, अर्चन और ध्यान  आदि उपायों से भगवान के चरणों में भक्तिभाव प्राप्त करें ,यही परमधर्म भी है !

क्रमशः 
निवेदक : व्ही एन श्रीवास्तव 'भोला' 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Type your comment below - Google transliterate will convert english letters to hindi eg. bhola - भोला, hanuman - हनुमान, mahavir - महावीर, after you press the space bar. Use Ctrl-G to toggle between languages.

कमेन्ट के लिए बने ऊपर वाले डिब्बे में आप अंग्रेज़ी के अक्षरों (रोमन) में अपना कमेन्ट छापिये. वह आप से आप हिन्दी लिपि में छप जायेगा ! हिन्दी लिपि में छपे अपने उस कमेन्ट को सिलेक्ट करके आप उसकी नकल नीचे वाले डिब्बे में उतार लीजिये ! जिसके बाद अपना प्रोफाइल बता कर आप अपना कमेन्ट पोस्ट कर दीजिये ! मुझे मिल जायेगा ! हनुमान जी कृपा करेंगे !

महावीर बिनवउँ हनुमाना ब्लॉग खोजें

यहाँ पर आप हिंदी में टाइप कर के इस ब्लॉग में खोज कर सकते हैं. उदाहरण के लिए bhola टाइप कर के 'स्पेस बार' दबाएँ, Google transliterate से वह अपने आप 'भोला' में बदल जाएगा . 'खोज' बटन क्लिक करने पर नीचे उन पोस्ट की सूची मिलेगी जिनमें 'भोला' शब्द आया है . अपने कम्प्यूटर पर हिंदी में टाइप करने के लिए आप Google Transliteration IME को डाउनलोड कर उसका उपयोग भी कर सकते हैं .