सिया राम के अतिशय प्यारे, अंजनिसूत मारुती दुलारे,
श्री हनुमान जी महाराज
के दासानुदास श्री राम परिवार द्वारा
पिछले अर्ध शतक से अनवरत प्रस्तुत यह

हनुमान चालीसा

बार बार सुनिए , साथ में गाइए ,
हनुमत कृपा पाइए .

[शब्द एवं धुन यहीं उपलब्ध हैं]

प्रार्थी - "भोला" [ श्री राम परिवार का एक नगण्य सदस्य ]




आज का आलेख

बुधवार, 29 दिसंबर 2010

साधक साधन साधिये # २ ५ ३

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हनुमत कृपा 
अनुभव
                                            साधक साधन साधिये


प्रियजन पिछले ३-४ दिनों में  विश्व के मौसम में अप्रत्याशित बदलाव हुए ! सुनने में आया क़ि भारत के उत्तर में डल झील जम गयी , दिल्ली और आसपास का तापमान शून्य के काफी निकट आ गया और भारी कोहरे के कारण हवाई और रेल यात्रा दो तीन  दिनों के लिए करीब करीब ठप्प ही हो गयी !


यहाँ की न पूछिए , उत्तर पूर्वी यू.एस. ए. क्रिसमस के बाद से बिल्कुल जमा पड़ा है ! २६ , दिसम्बर की रात भर भयंकर बर्फबारी हुई !तेज़ हवाएं चलीं ! सरकार नें कहीं कहीं आपात कालीन आदेश जारी कर दिए ! लोगों  को घर से बाहर न निकलने और खुले में सडकों पर कम से कम आने का अनुरोध किया गया !  दफ्तर के काम घर से ही निपटाने की सलाह दी गयी ! यहाँ के भी ,सभी हवाई अड्डे बंद हो गये ,विमानों की आवाजाही रुक गयी !


ह्मारे नगर ब्रूकलाइन में चारों तरफ १८ से २४ इंच मोटी बर्फ की तह जमी पड़ी है!गनीमत यह है क़ि स्थानीय सरकारे थोड़ी थोड़ी देर में "स्क्रेपर्स"से यहाँ के रास्तों की बर्फ खुरचकर साफ़ करती रहती है ! बर्फ की सफेद चादर पर यहाँ की सडकें परमानेंट मारकर से खीचीं काली लकीरों सी चमकती हैं ! फिर भी बिना आवश्यकता के बाहर निकल पाना कठिन है , क्योंकि बाहर का तापमान दिन भर शून्य से  नीचे रहता है ,हालां क़ि सुबह से ही यहाँ चारोँ ओर चिलचिलाती धूप खिली रहती है !


ये सब क्यों लिख रहा हूँ ,प्रियजन ! इस लिए क़ि इन बर्फीले दिनों में जहाँ एक तरफ मेरे  मस्तिष्क की रोश्नायी बिल्कुल जम गयी ,वहीं मेरे कम्प्यूटर जी ने भी बापू गांधी जी सा असहयोग आन्दोलन छेड़ दिया था ,यही नहीं , यहाँ का  इंटरनेट कनेक्शन भी ज़ोरदार बर्फीली हवा के झोकों के कारण खुल गया था और मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे मेरे हाथ पैर ही कट गये थे  ! चलिए आज ये तकनीकी खराबियां सुधर गयीं ,लेकिन---इष्टदेव श्री हनुमान जी भी इन बर्फीले दिनों में मुझसे कुछ बोल नहीं रहे हैं ! कोई निर्देश, कोई प्रेरणा ,कोई विचार उनकी तरफ से नहीं मिल रहा है ! प्रियजन ,प्रार्थना करिए क़ि वह मुझ पर पुनः कृपा करें ,मुझे सुबुद्धि प्रदान करें क़ि मैं शीघ्रताशीघ्र ,आपकी सेवा चालू कर दूं ! 


आज यहीं समाप्त करता हूँ , कल फिर मिलूँगा ( वह कृपा करेंगे ही )


निवेदक :- व्ही. एन. श्रीवास्तव "भोला"
78, Clinton Road ,Brookline . MA 02445 (USA)


   

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