सिया राम के अतिशय प्यारे, अंजनिसूत मारुती दुलारे,
श्री हनुमान जी महाराज
के दासानुदास श्री राम परिवार द्वारा
पिछले अर्ध शतक से अनवरत प्रस्तुत यह

हनुमान चालीसा

बार बार सुनिए , साथ में गाइए ,
हनुमत कृपा पाइए .

[शब्द एवं धुन यहीं उपलब्ध हैं]

प्रार्थी - "भोला" [ श्री राम परिवार का एक नगण्य सदस्य ]




आज का आलेख

मंगलवार, 18 जनवरी 2011

साधन-"भजन कीर्तन" # २ ७ ०

Print Friendly and PDF
हनुमत कृपा -अनुभव                  साधक साधन साधिये                                                                               
                                                 साधन -"भजन कीर्तन"

प्रियजन ! यदि एक बार भी आपको आपके "इष्ट देव" का "स्मरण" हुआ ,एक एक कर के आपको उनकी असीम करूणा , अपार दया, उनके अनंत गुणों तथा असंख्य उपकारों की याद आयी ,जी हाँ यदि एक बार ,केवल एक बार भी आपके हृदयाकाश में उनकी "याद" पावस की काली घटाओं में बिजली की एक रजत रेखा के समान कौंध गयी , ( आपको "उनका" वास्तविक "सिमरन" हो गया)  , तो क्या बात है ,आपकी तो बात ही बन गयी ! उसके बाद आप चाहे योगासन में बैठ कर पातंजली  द्वारा प्रतिपादित एवं निर्धारित वैज्ञानिक योगिक क्रियाओं को करें, अथवा अपने "अधिष्ठान" के सन्मुख आँख मूदे बैठ कर विधि पूर्वक ध्यान लगायें ,या माला लेकर नाम जाप करें , प्रत्येक साधन से आपके सभी अनुष्ठान सफल होंगे !

पर मैं स्वयं उपरोक्त साधनों में से एक भी उचित ढंग से नहीं कर सका ! ६५ वर्ष की अवस्था से पहिले जब शरीर में शक्ति थी , सारे अंग प्रत्यंग ठीक ठाक थे ,नेत्रों को छोड़ अन्य सभी अवयव सुचारू रूप से गतिमान थे ,उन दिनों इमानदारी और इज्जत से परिवार पालन में चौबीसों घंटे जुटा मैं ,न तो "ध्यान" लगा पाया, न "योगिक क्रियाएँ " कर पाया , न विधिवत "जाप"  ही कर पाया ! और उसके बाद जब काम धंधे से छुट्टी मिली तब तक  शरीर ढीला पड़ गया था !

भक्ति का एकमात्र साधन जो मैंने बचपन से आज तक किया (या यूं कहें क़ि ,मैं कर पाया) वह है "भजन गायन" और "कीर्तन" ! शायद इसलिए क़ि मा के गर्भ में मैंने केवल भजन ही सुने ! भगवान का "रसरूप" इस प्रकार, अम्मा के हृदय से "आनंदरस" के रूप में परिवर्तित हो कर मेरे अंतर्मन में तभी से बस गया ! महापुरुषों से सुना है "नादोच्चारण "से "शब्द ब्रह्म" और "नाद एवं शब्द ब्रह्म" के  संयोग से "परब्रह्म" प्रकट होते हैं ! इसप्रकार मुझे ऐसा लगता है जैसे "सृष्टि सृजन  क्रम" के अनुसार अम्मा के भजन के स्वरों से ,"नाद ब्रह्म", नाद से "शब्द ब्रह्म" और अंत में प्रभु का "परम आनंदस्वरूप रस " - "रूप ब्रह्म" बन कर मेरे अंतर्मन में तब ही प्रकट हो गया होग़ा ! प्रियजन ! मैं यह अटकल "उनकी" प्रेरणा से ही कर रहा हूँ ! इससे अधिक और कुछ जानता समझता नहीं हूँ इस विषय में !

सुना है भजन कीर्तन में तल्लीनता ,"मैं - तुम" अथवा "अहम तवम" का भेद मिटा देती है  जिससे एक अपूर्व आनंद रस का अनुभव होता है ! आनंद रस में सराबोर रसिया (साधक)
एक प्रकार से "समाधिस्थ  ही हो जाता है ! उस मीठे नाद में ऐसा रम जाता है ,इतना मस्त हो जाता है क़ि उसे तन मन की सुधि नहीं रहती ! कीर्तन में गायक साधकों के स्वरों के अतिशय मधुर नाद एवं वाद्यों की झंकार तथा करतल ध्वनि के संयोग से एक अद्भुत दिव्यता अवतरित होती है जिससे गायकों एवं श्रोताओं को "परब्रह्म" के परमानंद स्वरूप में "परब्रह्म"के दर्शन की अनुभूति होती  है ! गायक साधक की ऑंखें भर आतीं हैं , गला अवरुद्ध हो जाता है, मुंह से बोल नहीं निकलते , वह रोमांचित हो जाता है , शीत काल में भी स्वेद से उसके वस्त्र गीले हो जाते हैं उसका , शरीर कम्पायमान होता है अथवा सुन्न होकर मूर्तिवत पड़ा रह  जाता है !


इसी स्थिति के सम्बन्ध में स्वामी जी महाराज ने भक्ति प्रकाश में कहा है :


                  गीत गाय के प्रेम के जब जन गद गद होय !
खिले नयन रोमांच से ,भक्ति जानिए सोय !!

राम चरित मानस में भगवान श्री राम ने भाई लक्ष्मण को "भक्त- भक्ति" के लक्षण  समझाते हुए यह कहा क़ि "कीर्तन भजन" करते करते,जिस साधक की  ऎसी स्थिति हो जाये वही मेरा सच्चा भगत है और मैं निरंतर ऐसे भगत के वश में रहता हूँ !! 
मम गुन गावत पुलक सरीरा !गद गद गिरा नयन भर  नीरा !!
काम आदि मद दम्भ न जाकें ! तात निरंतर बस मैं ताके !!

क्रमशः 
निवेद्क: व्ही. एन. श्रीवास्तव "भोला"
सहयोग : धर्मपत्नी - श्रीमती (डाक्टर) कृष्णा श्रीवास्तव 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Type your comment below - Google transliterate will convert english letters to hindi eg. bhola - भोला, hanuman - हनुमान, mahavir - महावीर, after you press the space bar. Use Ctrl-G to toggle between languages.

कमेन्ट के लिए बने ऊपर वाले डिब्बे में आप अंग्रेज़ी के अक्षरों (रोमन) में अपना कमेन्ट छापिये. वह आप से आप हिन्दी लिपि में छप जायेगा ! हिन्दी लिपि में छपे अपने उस कमेन्ट को सिलेक्ट करके आप उसकी नकल नीचे वाले डिब्बे में उतार लीजिये ! जिसके बाद अपना प्रोफाइल बता कर आप अपना कमेन्ट पोस्ट कर दीजिये ! मुझे मिल जायेगा ! हनुमान जी कृपा करेंगे !

महावीर बिनवउँ हनुमाना ब्लॉग खोजें

यहाँ पर आप हिंदी में टाइप कर के इस ब्लॉग में खोज कर सकते हैं. उदाहरण के लिए bhola टाइप कर के 'स्पेस बार' दबाएँ, Google transliterate से वह अपने आप 'भोला' में बदल जाएगा . 'खोज' बटन क्लिक करने पर नीचे उन पोस्ट की सूची मिलेगी जिनमें 'भोला' शब्द आया है . अपने कम्प्यूटर पर हिंदी में टाइप करने के लिए आप Google Transliteration IME को डाउनलोड कर उसका उपयोग भी कर सकते हैं .