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आज का आलेख

मंगलवार, 26 अप्रैल 2011

"सत्य साईँ बाबा" - श्रद्धांजली # 3 5 4

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मेरी श्रद्धांजली
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कोट्टयम केरल के मन्दिर में "अनंत शयनंम" की मुद्रा में लेटे योगेन्द्र 
तथा 
प्रयागराज में त्रिवेणी तट पर लेट कर विश्राम करते अंजनी सुत हनुमान जी 
के समान प्रशांत निलयम में अनंत विश्रामरत 
श्री श्री सत्य साईँ बाबा को समर्पित 
भोला की यह श्रद्धांजली     

मन का सुमन चढाने लाया श्रद्धांजलि में "साईँ" तुम पर
मेरा  अंतिम यही समर्पण  स्वीकारो  मुझ  पर करुणाकर 

    बाबा  मैंने कभी न मांगी तुमसे घड़ी अंगूठी माया   
बंद आँख कर खड़ा रहा मैं ,कुछ ना माँगा ,सब कुछ पाया
जय हो सत्य साईँ बाबा की 
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यहाँ U S A में Times Now और अन्य समाचार चेनेल्स पर वहां भारत में प्रशांत निलयम के कुलवंत हाल में पारदर्शी आवरण में ढँकी "सत्य साईँ बाबा" की छवि देख कर मैंने कल आपसे कहा था की मुझे तो बाबा अभी भी वैसे ही लग रहे हैं जैसा मैंने उन्हें ४० -४२ वर्ष पूर्व बंबई में देखा था ! चलिए वो कहानी ही पहले सुना दूँ :

तब हम बंबई के अँधेरी (पूर्व) के जे बी नगर में रहते थे ! बड़ी सडक के उस पार, मरोल में , literally,  stone throw distance पर "सत्य साईँबाबा" का एक सेंटर था ! बाबा  उन दिनों वहां आये थे और पास के एक बड़े पंडाल में रोज़ सुबह शाम आम जनता को दर्शन देते थे और स्वयम गा कर कीर्तन करवाते तथा प्रवचन भी देते  थे ! रोज़ी रोटी के चक्कर में तब हमारी दशा यह थी की , समझो घर के दरवाजे पर बाबा खड़े थे और हम अनजान थे ! हमे तो तब पता चला जब दूसरे या तीसरे दिन ,दफ्तर के एक मलयाली सहयोगी ने ,जो घर में भी हमारे पड़ोसी थे हमे बाबा के आगमन के विषय में बताया ! वे स्वयम बाबा के मुरीद भक्त थे ! उन्होंने  हमारे मन में भी बाबा के दर्शन की अभिलाषा जगा दी ! निश्चित हुआ की अगले दिन हम अपने कुछ दक्षिण भारतीय सहयोगियों के साथ बाबा के दर्शन करके ,बस और लोकल से नहीं ,बल्कि अपनी सरकारी कोटे से मिली प्रीमियर फिएट कार द्वारा फटाफट समय से दफ्तर पहुच जायेंगे !

कार्यक्रम के अनुसार अगले दिन बहुत सबेरे से ही हमारी कोलोनी में चहल पहल चालू हो गयी ! मेरे सहयोगी - रंगाराव, उन्नीकृष्णन और कल्याण रमण ७ बजे से ही तैयार होकर नीचे गाड़ी के पास खड़े हो गये !  पांचो बच्चों के टिफिन बॉक्स में उस दिन जल्दी जल्दी  सेंड विच भर कर कृष्णा जी ने उन्हें सेंट्रल स्कूल के लिए विदा किया और फिर मेरे दफ्तर वाले उन  तीनो सहयोगियों के साथ वह भी हमारे साथ चलीं !

हम बाबा के आगमन के समय से आधे घंटे पहले ही पहुंच गये ! पर तब तक सैकड़ों कारे  और हजारों स्कूटर मय अपनी सवारियों के वहां पहुंच चुके थे ! पंडाल से एक मील दूर भी कार पार्किंग की जगह नहीं मिली ! किसी तरह एक खाली प्लाट के चौकीदार से हमारे सहयोगियों ने फाटक खुलवा ही लिया और श्रीवास्तव सर की नयी गाड़ी की सुरक्षा की गारंटी हो गयी ! अब हमारी पंडाल तक की पैदल यात्रा चालू हुई ! मरोल तब आधा अधूरा ही बना था, रास्ते सकरे और कच्चे थे और हजारों की संख्या में जन समुदाय धूल उड़ाता हुआ दौड़ता हुआ पंडाल की ओर जा रहा था ! वहाँ पहुचते पहुचते हमे आधा घंटा और लग गया ! दंग रह गये यह देख कर की बैठने की कौन कहे वहा तो खड़े होने की भी जगह नहीं थी ! किसी तरह बाबा के आसन से काफी दूर , गेट के पास खड़े खड़े पैर टिकाने भर की जगह मिली !

वहाँ के साईसेवक जनसमुदाय से कीर्तन करवा रहे थे ! हम भी साईँ भक्तो की आवाज़ मे आवाज़ मिला कर कीर्तन करते रहे  ! तभी सहसा कीर्तन रुक गया ! सब समझे की बाबा आ गये ! हम भी चौकन्ने होकर इधर उधर देखने लगे ! पर तभी स्पीकर पर किसी ने ऐलान किया कि " बाबा के आने में अभी एक घंटा और लगेगा !" लगभग साढ़े नौ बज चुके थे दफ्तर के हम चार सीनियर अफसर एक साथ गैरहाजिर हो रहे थे , वहाँ तो हुडदंग मच रही होगी ! हमे जल्दी ही ऑफिस पहुच जाना चाहिए ! यह सोच कर हम सब पंडाल से निकल कर अपनी गाड़ी की ओर चल पड़े !

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प्रियजन आप निराश न होना! हमे थोड़ी देर में दर्शन हों जायेंगे! कल तक प्रतीक्षा कर लें !
निवेदक : व्ही. एन. श्रीवास्तव "भोला"
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3 टिप्‍पणियां:

  1. काकाजी प्रणाम ....आज भारत के सभी टी.वि.चैनलों ने ...बाबा के चिर महासमाधि का लाइव टेलीकास्ट किया ! मै बाबा को उनके जन्म दिन ही १९९५ में पुर्त्तापर्ती में जा कर दर्शन किया था ! उनहोने पुर्त्तापर्ती को स्वर्ग बना दिया है ! बहुत ही सुन्दर स्थान है ! अब इसकी महत्ता और बढ़ जाएगी ! बाबाके जीवन कान में बहुत सी बातें सुनाने को मिली ! किन्तु हजारो की आस्था को झुठलाया नहीं जा सकता ! जिन्होंने खोजा उन्ही ने पाया ! इस दर्शन के बाद ही मुझे १९९६ जून में लोकोपयालत पैसेंजेर का पदोन्नति आ गया ! सत...सत प्रणाम !

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  2. पढ़ते पढ़ते बीच में रुकना पड़ा है अच्छा तो नहीं लग रहा है किन्तु आपका आग्रह टाल भी नहीं सकते और इतनी महत्वपूर्ण जानकारी से हट भी नहीं सकते.जल्दी बताएं आगे क्या हुआ .

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  3. बहुत बहुत आभार इतनी ज्ञानवान प्रस्तुति के लिए आगे की पोस्ट की प्रतीक्षा रहेगी माँ एक एक श्वास है

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