सिया राम के अतिशय प्यारे, अंजनिसूत मारुती दुलारे,
श्री हनुमान जी महाराज
के दासानुदास श्री राम परिवार द्वारा
पिछले अर्ध शतक से अनवरत प्रस्तुत यह

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प्रार्थी - "भोला" [ श्री राम परिवार का एक नगण्य सदस्य ]




आज का आलेख

मंगलवार, 6 सितंबर 2011

मुकेशजी और उनका नकलची "मैं"

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मुकेश जी
आज जब आप 'खुदा के गाँव' पहुँच गए
आत्मा परमात्मा का मिलन हो गया
प्यार की नदी परमानन्द के सागर से मिल गयी
नीर क्षीर में कोई भेद न रहा
मुझे आप में "मेरे प्यारे प्रभु" और "प्रभुजी" में आप नज़र आ रहे हैं
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प्रियजन ,
मुकेशजी से केवल मेरी जान पहचान ही नहीं थी ,सच पूछिए तो फिल्मी गायकी के क्षेत्र में वह मेरे आदर्श,मेरे मेंटर ही नहीं वरन मेरे "इष्ट" के समान मेरी परम श्रद्धा के पात्र भी थे ! उनसे दो भेंट में ही मैं जान गया कि जीवनकाल में उनके प्रति मेरा आकर्षण दैवयोग से 'मेरे इष्ट' की कृपा से ही हुआ है ! उनके जाने पर तो यह मत और दृढ हो गया !

२००३ से आज तक ,यहाँ अमेरिका में मुझे क्रिटिकल हालत में तीन बार होस्पिटल में एडमिट होना पड़ा है ! एक बार हॉस्पिटल के बेड पर लेटे लेटे मेरे " डेविल्स वर्कशॉप " में अनायास ही मुकेश जी की याद आयी जिसमे जीवन मरण की कुछ वीभ्स्त कल्पनाएँ हुईं जिनका उल्लेख कर अपने स्वजनों को दुखी नहीं करना चाहता ! आज आपको उस समय मेरे मन में उठे एक दूसरे विचार से अवगत करवा रहा हूँ ! मानव स्वभाव वश ,किंचित थोडा अहंकारी बन कर मैं उस दिन अपनी तुलना मुकेशजी से करने लगा था !

मुकेशजी और मैं दोनों ही जुलाई के महीने में इस धरती पर आये ,हम दोनों ही "केंसेरियन" हैं और इत्तेफाक से बाह्यस्वरूप -"लुक्स" में मैं उनसे जितना मिलता हूँ ,सो तो आपने देखा ही है ! इसके अतिरिक्त , उनके स्टेंडर्ड का नहीं पर मैं भी थोडा बहुत गा बजा लेता हूँ तभी तो शुरू से ही लोग मुझे 'मुकेश' जी का नकलची "भोला" कहते हैं !

और एक सबसे बडी समानता जो उनमे और मुझमे है वह है हम दोनों का प्रभु की कृपा पर अनन्य भरोसा और ईश्वरीय कृपा पर हमारी सम्पूर्ण निर्भरता ! हम दोनों का यह दृढ़तम विश्वास है कि हमारे जीवन में अब तक जो हुआ है,अभी जो होरहा है और आगे जो भी होने को है ,वह सब प्यारे प्रभु के इच्छानुसार ही हुआ है और होता रहेगा ! और उसमें ही हम सब का वास्तविक कल्याण निहित है !

उनका यह दृढ़ मत था ,और मेरा भी कि , सांसारिक कोई व्यक्ति अथवा कोई परिस्थिति हमारे दुःख सुख का कारण नहीं होती ! हम अपने निज कर्मों के फलस्वरूप ही जीवन में प्रसन्न अथवा दुखी होते हैं ! उनका कहना था कि केवल प्रभु के नाम का जाप ही हमे दुखों से छुटकारा दिला सकता है ! आपने शायद उनका ये भजन सुना होगा -

प्रभु का नाम जपो मन मेरे , दूर करे वो ही संकट तेरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे , हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
प्रभु का नाम जपो मन मेरे

मुकेशजी द्वारा गायी श्री रवीन्द्र जैन जी की यह शब्द एवं स्वर रचना मुझे मेरे गुरुमंत्र के समान प्रिय लगती है ! इस भजन को बार बार सुन कर और स्वयम गा गा कर मैंने अपने जीवन में आये बड़े से बड़े दुःख को भी भयंकर दिवा स्वप्न समझ कर झुठला दिया ! यदि आपने यह भजन नहीं सुना है , तो मैं ही किसी दिन सुना दूंगा ,थोडा स्वस्थ हो जाऊं तब !

स्नेही पाठकगण , केवल मुकेशजी में ही नहीं ,आप सब में भी मुझे अपने प्रियतम प्रभु के दर्शन होते हैं ! मेरा दिल केवल उनसे ही नहीं आप सब से भी उतना ही लगा है जितना अपने प्यारे इष्ट से ! इन्ही भावनाओं से भरपूर अपना एक भजन सुनाने जा रहा हूँ जिसके शब्द एक पारंपरिक स्थायी पर ,एक मध्य रात्रि , जब मैं यहाँ अमेरिका में अति रुग्ण अवस्था में पड़ा था ,"प्रभु" की प्रेरणा से, अनायास ही मेरे मुख से प्रस्फुटित हुए :

तुझसे हमने दिल है लगाया जो कुछ है सो तू ही है
हर दिल में तू ही है समाया , जो कुछ है सो तू ही है



तुझसे हमने दिल है लगाया , जो कुछ है सो तू ही है
हर दिल में तू ही है समाया , जो कुछ है सो तू ही है

तू धरती है तू ही अम्बर , तू परबत है तू ही सागर
कठपुतले हम तू नटनागर , जड चेतन सब को ही नचाया
तुझसे हमने दिल है लगाया , जो कुछ है सो तू ही है

सांस सांस में आता जाता , हर धड़कन में याद दिलाता ,
तू ही सबका जीवन दाता , रोम रोम में तू हि समाया
तुझसे हमने दिल है लगाया , जो कुछ है सो तू ही है

बजा रहा है मधुर मुरलिया , मन वृन्दाबन में सांवरिया
सबको बना दिया बावरिया , स्वर में ईश्वर दरस कराया
तुझसे हमने दिल है लगाया , जो कुछ है सो तू ही है

गीतकार स्वरकार गायक :
आपका स्नेही
मुकेशजी का नकलची
"भोला"
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शेष अगले अंक में
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निवेदक : व्ही .एन. श्रीवास्तव "भोला"
सहयोग : डॉक्टर श्रीमती कृष्णा "भोला" श्रीवास्तव
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4 टिप्‍पणियां:

  1. काका जी प्रणाम मन गद - गद हो गया !

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  2. गोरख जी , हमारे और आपके दोनों के "रामजी" में ही वह ऊपरवाले "रामजी" अपने सभी अंशों के साथ विद्यमान हैं ! हम जितना स्नेह अपने "रामजी" को देंगे ,वह सब का सब उन ऊपर वाले रामजी को हमारे प्रसाद नैवेद्य-पत्र-पुष्प सद्रश्य स्वीकार्य होगा ! मेरा दृढ़ विश्वास है कि :
    हर दिल जो प्यार करेगा ,वो "हरि" को पायेगा
    जो सबको प्यार करेगा "हरि" से मिल जायेगा

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  3. काका जी नमस्ते ! दिव्या जी को बहुत धन्यवाद जिनके द्वारा आपके इतने सुन्दर पोस्ट के बारे में पता चला ! बचपन में मुकेश जी के द्वारा गए राम की आराधना के गीत मुझे भी बहुत पसंद थे यूँ लगता था की ह्रदय के अन्दर से आवाज आ रही हो

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