सिया राम के अतिशय प्यारे, अंजनिसूत मारुती दुलारे,
श्री हनुमान जी महाराज
के दासानुदास श्री राम परिवार द्वारा
पिछले अर्ध शतक से अनवरत प्रस्तुत यह

हनुमान चालीसा

बार बार सुनिए , साथ में गाइए ,
हनुमत कृपा पाइए .

[शब्द एवं धुन यहीं उपलब्ध हैं]

प्रार्थी - "भोला" [ श्री राम परिवार का एक नगण्य सदस्य ]




आज का आलेख

बुधवार, 19 फ़रवरी 2014

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 स्वजनों के नाम, 
"भोला कृष्णा " का,  
भारत से प्रेषित , पहला सन्देश
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प्रियवर ,

जनवरी ११ के बाद आज "लेपटॉप" पर  बैठा हूँ ! १४ जनवरी को आँख में तीसरी सुई लगी ! २३ को भारत के लिए प्रस्थान किया , २५ को पहुंचा  ! 

बोस्टन जैसी ठंड तो न थी , लेकिन  पालम एयर पोर्ट और उसके आसपास का समग्र वायुमंडल धूल धुंआ और धुंध से लदा हुआ था ! ४० - ५० गज से अधिक दूर की सड़क की 
'नियोंन लाइट्स" भी ढिबरियों की लौ के समान टिमटिमा रहीं थीं ! हवा इतनी भारी कि सांस लेने में भी अत्यंत कठिनाई हो रही थी ! 


ऐसे में इस बार , ५ वर्ष के  अंतराल के बाद भारत आने पर भी वही हुआ जो हर बार होता है ! आशंका के अनुरूप दिल्ली पहुँचते ही खांसी और ज्वर ने जकड लिया ! 


फिर भी ,परिवार का बुज़ुर्ग होने के नाते,जिस पारिवारिक उत्सव में शामिल होने  के लिए भारत आया था , वहाँ पहुचना आवाश्य्क था , अस्तु ३, ४, ५ फरवरी को लखनऊ और ६ से १० फरवरी तक कानपुर में रहा और अब् वापस छोटे पुत्र माधव जी के पास नोएडा में रह रहा हूँ !  पूर्व निश्चित कार्यक्रम के अनुसार , प्यारे प्रभु की कृपा से , इस बार के भारतीय प्रवास के अंतिम दिवस तक यहीं रहूँगा ! 


वैसे हमसब जानते ही हैं कि "फाइनली" 
होगा तो वही जैसी हरि इच्छा होगी !  


प्रियजन , फिलहाल , इतना ही !


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  ५ वर्ष बाद भारत पहुंचे हम दोनों के कुछ चित्र देखिये 
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१. भारत भूमि पर उतरते ही पालम एयर पोर्ट के आगे व्हील चेयर्स पर पौत्री आकांक्षा की देख रेख में बेटी प्रार्थना के कार की प्रतीक्षा करते समय का चित्र संलग्न है !




२. एक अन्य चित्र , "पापा अम्मा , बाबा दादी , नाना नानी के भारत आगमन पर  खुशियाँ मनाते "भोला कृष्णा" और उनके प्यारे बच्चे" !


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अब् तो विश्वास हुआ आपको कि ५  वर्षों के लम्बे अंतराल के बाद , आपके स्नेही ,शुभाकांक्षी ,बुज़ुर्ग भोला बाबू  सपत्नीक भारत पहुँच ही गये !

प्यारे प्रभु श्री राम की अहेतुकी कृपा सब पर सदा सर्वदा बनी रहे !


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निवेदक :- व्ही. एन. श्रीवास्तव "भोला"
सहयोग :- श्रीमती कृष्णा भोला श्रीवास्तव 
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