सिया राम के अतिशय प्यारे, अंजनिसूत मारुती दुलारे,
श्री हनुमान जी महाराज
के दासानुदास श्री राम परिवार द्वारा
पिछले अर्ध शतक से अनवरत प्रस्तुत यह

हनुमान चालीसा

बार बार सुनिए , साथ में गाइए ,
हनुमत कृपा पाइए .

[शब्द एवं धुन यहीं उपलब्ध हैं]

प्रार्थी - "भोला" [ श्री राम परिवार का एक नगण्य सदस्य ]




आज का आलेख

रविवार, 30 अगस्त 2015

ओं नमः शिवाय -

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ओम नमः शिवाय 


 महापुरुषों का कथन है कि जीवों के परमाधार 'परमेश्वर'  के  कृपास्वरुप का नाम "श्री राम "है 
उनके प्रेमस्वरुका  नाम  "श्री कृष्ण"  हैं , 
उनके"वात्सल्य स्वरुप" का नाम  "आदि शक्ति माँ जगदम्बा" हैं 
तथा 'वैराग्य  स्वरुप'का नाम भगवान  शिव है !  

परम पिता परमेश्वर  के गुण , स्वभाव और  क्रिया -कलाप के कारण ही उनके वैराग्य स्वरूप को श्रद्धालु  भक्तजन  शिव ,शंकर ,भोला ,महादेव ,नीलकंठ , ,नटराज,त्रिपुरारी , अर्धनारीश्वर ,विश्वनाथ आदि अनेकानेक  नामों से उनका नमन -वन्दन  करते है !"

शिव" का शब्दार्थ है " कल्याण"! महामहिमामय देवोंके देव महादेव का स्वरूप तेजोमय और कल्याणकारी है ! 
अपने इष्ट श्री राम  के अमृत तुल्य मधुर नाम का  सतत जाप करने वाले भोलेभाले देवता 'शिव-शंकर' ने क्षीरसागर के मंथन से प्राप्त भयंकर विष, का सहर्ष पान किया था ! 
उसे अपने कंठ से नीचे नहीं उतरनेदिया क्योंकि "कालकूट" यदिशंकरके उदर तक पहुंच जाता तों समस्त सृष्टि का ही विनाश हो जाता , न सुर बचते न असुर  !   और यदि शिव   विषपान न करते तों बल मिल जाता  असुरों के  अहंकार को !फिर   देवताओं तथा मानवता का विपत्ति निवारण असंभव हो जाता ! 

 इसी कारण कर्पूर के समान चमकीले गौर वर्णवाले ,करुणा के साक्षात् अवतार,  असार संसार के एकमात्र सार, गले में भुजंग की माला डाले,भगवान शंकर जो माता भवानी के साथ भक्तों के हृदय कमलों में सदा सर्वदा बसे रहते हैं हम उन देवाधिदेव की वंदना करते है .,विशेषकर सावन मास में!

कर्पूरगौरम  करुणावतारम  संसारसारं  भुजगेंद्रहारम 
     
सदावसंतम हृदयारविन्दे भवम भवानी सहितं नमामि 

तुलसीदास की अनुभूति में 'शिव" ऐसे देव हैं जो अमंगल वेशधारी होते   हुए  मंगल की राशि है ;महाकाल के भी काल  होते हुए करुणासागर हैं !,

प्रभु समरथ सर्वग्य  सिव सकल कला गुन धाम 

जोग  ज्ञान  वैराग्य   निधि  प्रनत कल्पतरु नाम !!
( शिव समर्थ,सर्वग्य,और कल्याणस्वरूप ,सर्व कलाओं और सर्व गुणों केआगार हैं ,योग ,ज्ञान तथा वैराग्य के भंडार हैं ,करुणानिधि हैं कल्पतरु की भांति  शरणागतों कों वरदान देने वाले  औघड़दानी हैं )

आइये आज सोमवार को हम सब समवेत स्वरों में पूरी श्रद्धा एवं निष्ठां से ,गुरुजनों के भी सद्गुरु ,सर्व गुण सम्पन्न सर्वशास्त्रों के ज्ञाता ,सर्व कला पारंगत राम भक्त , देवाधिदेव ,  देवताओं समेत समस्त सृष्टि  के पालन हारसब को निःसंकोच वर देने वाले , भोले नाथ शिव शंकर की वन्दना करें !





https://youtu.be/meclUBvlyTc  

(यूट्यूब पर देखने के लिए लिंक )


जय शिवशंकर औगढ़ दानी , विश्वनाथ विश्वम्भर स्वामी !

सकल श्रृष्टि के सिरजनहारे , रक्षक पालक अघ संघारी !!

हिमआसन त्रिपुरारी बिराजें , बाम अंग गिरिजा महारानी !!

औरन को निज धाम देत हो हम ते  करते आनाकानी !!

सब दुखियन पर कृपा करत हो , हमरी सुधि काहे बिसरानी !!

"भोला"

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निवेदक :  व्ही .  एन.  श्रीवास्तव  "भोला"

शोध एवं संकलन सहयोग : श्रीमती कृष्णा भोला श्रीवास्तव 

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सोमवार, 24 अगस्त 2015

राम सकल नाम्न ते अधिका !! तुलसी !!

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राम रामेंति रामेति रमे रामे मनोरमे !
सहस्त्र नाम ततुल्यं राम नाम वरानने !

महामुनि बुधकौशिक ऋषि द्वारा रचित श्री राम रक्षा स्रोत के देवता हैं युगल श्रीरामभद्रजी  एवं जगद्जननीजानकी मातेश्वरी श्रीसीता जी !

इस महामंत्र के गुणातीत देवता श्रीरामजानकी युगल के दिव्य सद्गुनों की इतनी सार्थक व्याख्या  एवं महिमा  का इतना सरस सुमधुर गायन अन्यत्र किसी भी साहित्य में उपलब्ध नही है !

उपरोक्त श्लोक की दूसरी पंक्ति में समाहित है समग्र स्तोत्र का सारांश 
सहस्त्र नाम ततुल्यं राम नाम वरानने !
अर्थात 
अन्य सहस्त्रों देवताओं के नामो से बढ़ चढ़ कर है श्री राम नाम !

रामभक्त संत तुलसीदास जी ने भी राम नाम को सर्वोच्च कहा  :

ब्रह्म अनामय अज भगवंता ! व्यापक अजित अनादि अनंता !!
हरि व्यापक सर्वत्र समाना ! प्रेम ते प्रगट होहिं मैं जाना !!
यद्यपि प्रभु के नाम अनेका ! श्रुति कह अधिक एक ते एका !!
राम सकल नामन्ह ते अधिका ! ............................!!

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संत तुलसीदास की उपरोक्त चौपाइयों का अपना गायन आपको फिर कभी सुनायेंगे आज हम आपको सुना रहे हैं वर्तमान रामनाम साधिका श्रीमती शांतादयाल जी द्वारा रचित स्वरबद्ध किया तथा गाया  यह भजन , जो उन्होंने १९८३ -८४  हमारे कानपुर के अमृतवाणी सत्संग  में गाकर सभी साधकों को भाव विभोर कर दिया था ! लीजिए सुनिये और देखिये 

सुमिर् राम का नाम मन रे , सुमिर राम का नाम !!
रामनाम सब पाप निवारे , रामनाम जप भव भय तारे !!
तर जा भव सागर से प्राणी ,  सुमिर राम का नाम !!

राम जाप जब होगा निरंतर , प्रेम प्रगट होगा घट अंतर !!
ज्योति जगेगी छवि  प्रगटेगी , दर्शन देंगे राम !!
मगन हो जपले राम का नाम ! सुमिर राम का नाम !!





भक्ति करो श्री राम चन्द्र की , सेवा उन्ही के चरणों की !!
मन में उनकी छवि बसा लो ,जपो निरंतर नाम 
मगन हो जप ले राम का नाम !!

सुमिर राम का नाम मन रे सुमिर राम का नाम !!
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youtube LINK :

https://youtu.be/OeHBUNlLrPU

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निवेदक :   व्ही . एन.  श्रीवास्तव "भोला"
तकनीकी सहयोग : श्रीमती डॉक्टर कृष्णा भोला श्रीवास्तव 
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रविवार, 9 अगस्त 2015

श्रावण के सोमवार ..भगवान शिव शंकर को समर्पित

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ओम नमः शिवाय 
शिव शंकर   समर्थ,सर्वग्य,,सर्व कलाओं और सर्व गुणों के आगार हैं ,योग ,ज्ञान और ,वैराग्यकेभण्डार हैं !  वे कल्याणस्वरूप हैं,करुणानिधि हैं ,भक्तवत्सल हैं ,कल्पतरु की भांति  शरणागत को वरदान देने वाले   देव हैं !

हमारे  ऋषि मुनियों ने साक्षात्कार के अनुभूत तथ्यों के  आधार पर"ओंकार" के मूल विभु व्यापक तुरीय  शिव के  निराकार ब्रह्म स्वरूप को  साकार स्वरूप दे कर उसे अलौकिक वेशभूषा  से सुसज्जित किया है ! उनके  शरीर  को भस्म से विभूषित  किया है ,  गले में सर्प और  रुंड मुंड की माला डाली है ,  जटाजूट में पतित पावनी "गंगधारा" को विश्राम दिया है  ,  भाल  को दूज के चाँद से अलंकृत किया है ,  एक हाथ में  डम डम   डमरू  तो दूसरे हाथ  त्रिशूल दिया है 1

श्रावण के दूसरे सोमवार के शुभ प्रातः आप की सेवा में प्रस्तुत है 
 भक्तवत्सल महादेव "शिव शंकर" के विभिन्न विग्रहों के सुदर्शन !
पार्श्व में सुनें निवेदक "भोला" के वयोंवृद्ध कंठ से प्रस्फुटित   
 शंकर वंदना 
जय शिवशंकर त्रिपुरारी ,

जय शिवशंकर त्रिपुरारी !
जय जय   भोले   भंडारी   ! जय आशुतोश   कामारी !!
जय शिवशंकर त्रिपुरारी ! 

गौर वदन माथे पर चंदा , 
जटा संवारें सुरसरि गंगा !!
चिताभसम तन धारी !  जय शिवशंकर त्रिपुरारी !!

उमा सहित कैलाश बिराजे ,
गणपति कार्तिक नंदी साजे !
छवि सुंदर मन हारी ! जय शिवशंकर त्रिपुरारी !! 

भक्त जनन पर कृपा करत हो, 
दुख दारिद भव ताप हरत हो ,!
हमका काहे बिसारी ?  जय शिवशंकर त्रिपुरारी !!
जय जय   भोले   भंडारी   ! जय आशुतोश   कामारी !!
जय शिवशंकर त्रिपुरारी ! 
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 सर्व- कष्ट -निवारक - "महामृत्युंजय मंत्र" 
ओम त्रियम्बकम यजामहे सुगंधिम पुष्टि वर्धनम 
उर्वारुकमिव  बंधनान  मृत्युर मुक्षीय माम्रतात !!
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( शब्द एवं स्वरकार-गायक "भोला")
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निवेदक ;  व्ही   एन श्रीवास्तव  "भोला"
सहयोग ;  श्रीमती डॉ. कृष्णा भोला श्रीवास्तव 
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LINK 
+https://youtu.be/ZavOzVsM1XM

   


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