सिया राम के अतिशय प्यारे, अंजनिसूत मारुती दुलारे,
श्री हनुमान जी महाराज
के दासानुदास श्री राम परिवार द्वारा
पिछले अर्ध शतक से अनवरत प्रस्तुत यह

हनुमान चालीसा

बार बार सुनिए , साथ में गाइए ,
हनुमत कृपा पाइए .

[शब्द एवं धुन यहीं उपलब्ध हैं]

प्रार्थी - "भोला" [ श्री राम परिवार का एक नगण्य सदस्य ]




आज का आलेख

सोमवार, 19 सितंबर 2011

नाम महिमा

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प्रभु का नाम सकल दुःख टारे
संकटहर ,त्रयताप उबारे

(भोला)

( केवल प्रभु के नाम का स्मरण ही हमारे सभी दुखों को टाल सकता है और
हमारे संकट का हरण कर हमे तीनों तापों से उबार सकता है )
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परमप्रिय स्नेही पाठकगण , हम कुछ दिनों से "तीन तापों" के विषय में चर्चा कर रहे हैं , और इन्हीं कुछ दिनों में हमारे "प्यारे प्रभु" ने ,एक एक कर के , इन तीनों तापों के नमूनों से हमारा सामना करवा दिया !

संसार में अन्यत्र क्या क्या हो रहा है कहाँ तक गिनाएं ! अपने पड़ोस के मुल्कों को ही देखें - पाकिस्तान में फिदायनी हमलावर कितना नरसंहार कर रहे हैं और अफ़गानिस्तान में कितने तालिबानी आक्रमण और बदले की भावना से कितने जवाबी ड्रोन हमले हो रहे हैं ! जान माल का बेहिसाब नुक्सांन हो रहा है चारों तरफ ! कौन है इसका उत्तरदायी ? मानव और कौन !

हमारी भारत भूमि पर भी आतंकवादी हमले हो रहे हैं ! अभी सात सितम्बर को दिल्ली हाई कोर्ट की बमबारी में कितने ही बेकसूर दम तोड़ चुके हैं और कितने आई सी यू में बुरी तरह घायल पड़े तड़प रहे हैं ! कुछ दिनों बाद आगरा के एक होस्पिटल में भी बम फटा ! कोई तत्काल हताहत नहीं हुआ लेकिन सोचने की बात है होस्पिटल में बम् बारी क्यों ? इन जघन्य कर्मों को करने वाले भी तो हम मानव ही हैं !

अभी दक्षिण भारत में एक भयंकर रेल हादसा हुआ ! कितने रेल यात्री हताहत हुए , कितनी सम्पत्ति का विनाश हुआ ! दोषी चाहे स्पीड लिमिट से अधिक रफ्तार से गाडी भगाने वाला इंजन का चालक हो या सिग्नल बनाने वाला पॉइंट मेंन हो , या कोई बड़ा अधिकारी हो, वह होगा तो एक मानव ही ! आधिदैहिक ताप से जलन का एक अन्य उदाहरण !

आधि दैविक ताप भी कहाँ शांत रहने वाली है ! वो भी ,सुनामी , हरीकेन ,अति वृष्टि,सूखा और भूचालों द्वारा अपनी विराट शक्ति का प्रदर्शन यदा कदा करती रहती है ! अभी पिछले शनिवार को ही भारतीय धरती को भयंकरता से कम्पायमान कर दिया एक भयंकर भूकम्प ने ! कितनी हानि जान मॉल की हुई उसका आंकलन करने के प्रयत्न जारी हैं !

वास्तव में , भूकम्प आते तो आधि दैविक कारणों से हैं लेकिन उनके आने से जो क्षति होती है वह मानवीय कारणों से होती है ! जान माल के नुकसान के लिए जिम्मेदार हैं देश के सरकारी अधिकारी जो भवनो के नक्शे , नियमों को बलाए ताख रख कर पास करते हैं , विकास के लिए उपलब्ध धनराशि से अपनी कोठी को फर्निश करते हैं , एयर कन्डीशनर लगवाते हैं , होस्पिटल के ब्लड बेंक के डीप फ्रीज, सी एम् ओ साहेब के घर में इस्तेमाल होते हैं ! सिविल ठेकेदार और हम नागरिक भी कोई कम नहीं हैं !हम जितना सक्रिय योगदान देते हैं इन सब कुकृत्यों में इन भ्रष्ट अधिकारीयों का, हमसे अच्छा कौन जानता है ! ताली बजाने में दूसरा हाथ तो हमारा ही है ! है न भैया ?

आप मानवता पर पड़ने वाले इन आकस्मिक कष्टों का कारण जानना चाहते हैं ! आपको आश्चर्य हो रहा होगा कि "वह" परम कृपालु , दीनानाथ , करुनासागर , दीनदयालु कहलाने वाला 'प्रभु" हमे ये हृदयविदारक नज़ारे क्यों दिखा रहा है ? इन हादसों के जरिये "वह" हमे क्या संदेश देना चाहता है ? प्रियजन , ये भयावह दृश्य दिखा कर "वह" हमे सावधान कर रहे हैं कि कमसेकम अब तो हम सुधर जाएँ ! कैसे सुधरें ?

मेरे प्यारे प्यारे पाठकों मैं तो केवल अपने सुधार की कहानी ही जानता हूँ ! कैसे इस अति साधारण भोले भाले "बलियाटिक" बालक का सुधार हुआ आप जानना चाहोगे तो सुनों (मैंने किसी दुर्भावना से स्वयम को "टिक" नहीं कहा मैं तो गर्व से कहता हूँ कि इस जीवन में मैं और चाहे जहां भी रहा हूँ , हूँ मैं शत प्रतिशत बलिया का ही )

हाँ तो मैं बता रहा था कि हम कैसे सुधरे ! प्रियजन हमारा सुधार गुरुजनों के आदेशानुसार आस्तिकता का मार्ग अपनाने से हुआ ! सद्गुरु ने एक सूत्र बताया था :

वृद्धी आस्तिक भाव की शुभमंगल संचार
अभ्युदय सदधर्म का राम नाम विस्तार

अमृतवाणी के पाठ से गुरुजन ने हमारे जीवन में "राम नाम" के प्रति एक अटूट श्रद्धा भर दी ! 'नाम" ने हमारे जीवन में सात्विकता ,अनुशासन और प्रेम का संचार किया ! फिर क्या था आनंद ही आनंद सर्वत्र !
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चलिए नाम महिमा पर मुकेशजी का एक भजन जो
श्री रविन्द्र जैन द्वारा रचित व स्वर बद्ध है ,
मैं स्वयम गा कर आपको सुना दूँ !

प्रभु का नाम जपो मन मेरे , दूर करे वही संकट तेरे



जीवन रैन बसेरा है क्या तेरा क्या मेरा है
क्यों इसका अफ़सोस करे रे , दूर करे वही संकट तेरे
प्रभु का नाम जपो मन मेरे
पिंजरा जब खुल जायेगा ,पंछी कब रुक पायेगा
क्यों नैनों से नीर झरे रे , दूर करे वही संकट तेरे
प्रभु का नाम जपो मन मेरे
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निवेदक : व्ही. एन. श्रीवास्तव "भोला"
सहयोग
विडीओग्राफी : (पौत्र) गोविन्द (१३ वर्षीय)
कम्प्यूटरीकरण : श्रीमती डॉक्टर कृष्णा भोला श्रीवास्तव
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4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर चिन्तन्…………और सार्थक विश्लेषण्।

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  2. Bhajan sun kar aise laga ki vastav mein aawaz antakaran se aa rahi hai - I am short of words for appreciation......Subhash Mehta

    उत्तर देंहटाएं

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