सिया राम के अतिशय प्यारे, अंजनिसूत मारुती दुलारे,
श्री हनुमान जी महाराज
के दासानुदास श्री राम परिवार द्वारा
पिछले अर्ध शतक से अनवरत प्रस्तुत यह

हनुमान चालीसा

बार बार सुनिए , साथ में गाइए ,
हनुमत कृपा पाइए .

[शब्द एवं धुन यहीं उपलब्ध हैं]

प्रार्थी - "भोला" [ श्री राम परिवार का एक नगण्य सदस्य ]




आज का आलेख

मंगलवार, 25 अक्तूबर 2011

शरणागति

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शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते

नवरात्रि - नौ देवियों की आराधना

नारायणी -"लक्ष्मी माता" के "शरण" की अपेक्षा
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कल "धनतेरस' की रात जब सोने चला उस समय भारत से प्रसारित सभी टेलीविजंन चेनलों पर दीप लड़ियों से जगमगाती भारतीय बाजारों की चमक दमक विशेषकर सोने चांदी के सिक्कों और आभूषणों के खरीदारों से खचाखच भरे बाज़ारों में चमचमाते जौहरियों के शो रूम देख कर आँखें चकाचौधिया गयीं !

इस विचार से कि आज धनतेरस के दिन , न तो हम् दोंनों ने , न हमारी जानकारी में हमारी यहाँ ,'यू . एस' वाली बहुओ ने ही लक्ष्मी माता को प्रसन्न करने के लिए कोई ऐसी खरीदारी करी ,मैं इस सोच में पड़ गया कि " क्या हम सब इस प्रकार "लक्ष्मीमैया" को रुष्ट करके 'पाप' के भागी नहीं बन रहे हैं ? क्या आज यह भयंकर भूल करके हम दोनों ने अपने तथा अपने बच्चों के भौतिक - दुनियावी तरक्की के दरवाजे ,अगले पूरे वर्ष के लिए बंद तो नहीं कर दिए ?


!! श्री महाललक्षम्याष्टकम् !!

नमोस्तेsस्तु महामाये श्रीपीठे सुर पूजिते !
शंख चक्र गदा हस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते!!
नमस्ते गरुड़ारूढे कोलासुर भयंकरि !
सर्व पाप हरे देवि महा लक्ष्मी नमोस्तु ते !!

+ + + + + +
( बीच के श्लोक फिर कभी )

महालक्ष्यअष्टकम स्त्रोतं य: पठेदुभक्तिमान्नर !
सर्वसिद्धमवाप्नोति राज्यम प्राप्नोति सर्वदा !!

भावार्थ

महालक्ष्मी जी की आठ पदों वाली यह स्तुति जो कोई साधक भक्ति सहित पढे अथवा लिखे ( जिसका सौभाग्य मुझे आज मैया की ही कृपा से मिला ) वह आठों सिद्धियों की प्राप्ति का अधिकारी बन जायेगा और उसे सब सांसारिक सम्पदा सहज में ही मिल जायेगी )

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उपरोक्त संस्कृत के श्लोकों में रचित लक्ष्मी माता की वन्दना के अतिरिक्त भारत की अन्य जन भाषाओँ में भी , "लक्ष्मी माता" की अनेकों पारंपरिक 'आरतियाँ' विश्व भर में प्रचलित हैं, परन्तु उन सब रचनाओं का भी भावार्थ उपरोक्त वन्दना के समान ही है ! यहाँ केवल एक आरती के ही कुछ अंश दे रहा हूँ :

लक्ष्मी जी की आरती
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ओम जय लक्ष्मी माता ,ओम जय लक्ष्मी माता
तुमको निसिदिन सेवत हर विष्णू धाता !!

ब्रह्माणी , रुद्राणी ,कमला तुम ही जग माता !
सूर्य - चन्द्रमा ध्यावत ,नारद ऋषि गाता !!

(बीच की अनेक चौपाइयां फिर कभी)

शुभ गुण मंदिर सुंदर क्षीरोदधि पाता !
रत्न चतुर्दिश तुम बिन कोई नहीं पाता !!

महालक्ष्मी जी की आरती , जो कोई नर गाता !
उर आनद समाता , पाप उतर जाता !!
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आज सबेरे सबेरे क्यों आई याद लक्ष्मी जी की ? कहीं रात के सपने में भी तो मुझे वे चमकते हुए स्वर्ण के आभूषण नहीं दिखे ? कहीं मैं रातोरात भारत पहुच कर टहलते टहलते "गौतम या "नानावती ,"भगतराम" अथवा "गुप्ता" अथवा केवल "राम" ज्वेलर्स के शो रूम में तो नहीं भटक गया ? या यहीं अमेरिका में "शेनेल" या "क्रिश्चन डॉयर" के परफ्यूम से गमकते किसी "माल" के ज्वेलरी आउटलेट में अकारण ही दाखिल हो गया ?
लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ था !

हुआ ऐसा कि यहाँ की ठंढक में आलस और शारीरिक कमजोरियों के कारण मुझे देर तक सोने की इजाजत है , सो मैं सबेरे आठ बजे से पहले उठ ही नहीं पाता हूँ ! इस बीच धर्मपत्नी एवं सहधर्मिणी कृष्णा जी नहा धो कर , हम् दोनों की तरफ से ,सम्पूर्ण परिवार के कल्याणार्थ देवी देवताओं को मनाने का अपना दैनिक नियम निभा लेती हैं !

सो आज जब मैं उठा उस समय मेरे कानों में कृष्णा जी के स्वर में "लक्ष्मीमैया" की उपरोक्त वन्दना और आरती पड़ी और ऐसा लगा जैसे पर्दे के पीछे से उस ऊपर वाले ने मेरे कानों में मेरे आज के ब्लॉग के लिए "शरणागति" का यह विशेष विषय "प्रोम्प्ट" कर दिया !

(शेष कल)
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निवेदक: व्ही. एन. श्रीवास्तव "भोला"
सहयोग: श्रीमती कृष्णा भोला श्रीवास्तव
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8 टिप्‍पणियां:

  1. प्रियवर अनुराग जी , राम राम ,
    आज दीपावली के शुभ पर्व पर आपका सन्देश पढ़ कर मन प्रफुल्लित होगया !यहाँ मैं और कृष्णा जी , हम् दोनों ,विवाह के बाद लगभग ५६ वर्षों से नित्यप्रति ,सपरिवार, यह प्रार्थना करते रहे हैं कि ;" मेरे प्रभु कुछ ऐसा कर कि सबप्राणियों में सद्भावना बढती रहे, सब परस्पर एक दूसरे से स्नेह करें, सब एक दूसरे का भला चाहें" ! लेकिन भैया यह् संसार ---- दुखी कर देता है !
    हम् सब अपने अपने बुरे खाते बंद ही नहीं करते ! यदि ऐसा होता तो संसार आनंदित हो जाता ! काश ऐसा हो पाता ?
    आपको एवं आपके परिवार को स्नेहिल हार्दिक शुभकामनायें
    भोला- कृष्णा

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  2. प्रभु तो भाव मे बसते हैं। दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें।

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  3. काका और काकी जी को प्रणाम - दिवाली बीत गयी ! आज भैया दूज है ! सभी बधाई आज ही प्रेधित कर रहा हूँ ! वैसे आप को बधाई नहीं दे सकता क्योकि छोटा हूँ ! वश आशीर्वाद की अभिलाषी हूँ ! बहुत दिनों से याद आ रही थी ! सोंचा था इ - मेल करने के लिए ! किन्तु ब्लॉग में पोस्ट देख ख़ुशी हुयी ! तवियत कैसी है ? पोस्ट पढ़ कर मन गद-गद हो गया !

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  4. आदरणीय भोला जी
    आपकी पोस्ट बहुत अच्छी लगी |
    बहुत छोटी हूँ - तो आपसे कुछ कहूं - उचित नहीं लगता | परन्तु आपने जो ऊपर टिपण्णी लिखी - उसे देख कर आपके स्वर में एक उदासी सी नज़र आई - तो चुप भी नहीं रहा जाएगा | सो लिख रही हूँ |

    भोला जी - इस संसार में जो भी कुछ होता है - प्रभु की इच्छा से ही होता है | यदि किन्ही लोगों के बीच कोई मिसंदार्स्तेंडिंग है - तो वह भी उनकी इच्छा के बिना नहीं हो सकती | प्रभु में विश्वास रखें, और अपनी चिंताओं को त्याग दें | जब दोनों ही पक्ष मूलरूप से भले मानुष हों - तो राहें स्वयं बन जाती हैं |

    यदि कोई किसी से नाराज़ हो - और उस पहले ने जानते बूझते , सोच समझ कर उस दुसरे का नुकसान न किया हो - तो प्रभु स्वयं ही कोई राह निकाल देंगे की सब ठीक हो जाए :) उन पर भरोसा रखिये |

    विश्वास रखें की प्रभु जो कर रहे हैं - उचित ही कर रहे हैं | चिंता करना एक शंका करने जैसे होगा प्रभु की निर्णय क्षमता और कार्यक्षमता पर | जो हो रहा है - होने दीजिये | जब उन्होंने बुरे खाते खुलवाये हैं - तो उन बुरे खातों को बंद भी वे ही कराएँगे - विश्वास रखिये उन पर :)

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  5. स्नेहमयी वन्दना जी:, राम राम ,!
    आप की कृष्ण लीला पढ़ कर बड़ा आनंद आता है ! ऐसा प्रतीत होता है जैसे "डोंगरे महराज" से सरस भागवत सुन रहे हैं ! आप की रचना वास्तव में सराहनीय हैं ! आपका बहुत आभार, ! यूं ही लिखती रहें !

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  6. स्नेहमयी शिल्पाजी राम राम ,
    आपके ब्लॉग में मानस एवं गीता विषयक लेख पढ़ कर हमारी कृष्णाजी को तब तक चैन नहीं पडती जब तक वह मुझे यें रचनाएँ पूरा पूरा सुना नहीं लेतीं ! मेरा ध्यान आकर्षित करने को वह शुरू करती हैं " वाह ,जरा सुनिये तो , बिलकुल आपकी जैसी शैली आपके जैसे शब्द " ! वास्तव में हम् दोनों ही मुझसे कहीं अच्छी भावनाओं से भरे आपके ब्लॉग पढ़ कर दंग रह जाते हैं !! आपकी शैली तो अवश्य ही मुझ अज्ञानी के हृदय से निसृत शब्दों से मेल खाती नज़र आती है लेकिन ज्ञान विज्ञान एवं आध्यात्मिकता की जैसी भावनाओं का चित्रण आप करती हैं मैं उससे बिलकुल ही अनिभिग्य हूँ ! आप की रचनाएँ सराहनीय हैं ! आपका बहुत आभार, यूं ही लिखती रहें ! शुभाकांक्षी - भोला-कृष्णा - ब्रूक्लाइन , मेसेच्युटिस्ट - यू एस ए

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  7. वाह! बहुत अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आकर.
    आपकी अनुपम पोस्ट और उस पर हुई टिप्पणियों
    को पढकर मन गदगद हो गया है.
    बहुत बहुत आभार और शुभकामनाएँ.

    मेरे ब्लॉग पर आप आये इसके लिए हृदय से आभारी हूँ आपका.

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  8. आपका बहुत धन्यवाद भोला जी - वैसे मैं इतनी तारीफ के लायक नहीं हूँ |.... :) राम जी जो लिखा दें - मैं लिख देती हूँ | प्रेरणा उनकी है, और गलतियाँ जो हों - वह मेरी हैं - | :)

    आपके ब्लोग्स पर आ कर सत्संग का जो सुख मिलता है - वही राकेश भैया के ब्लॉग पर भी हैं | :) मैं दिव्या जी की बहुत आभारी हूँ - की उनकी एक पोस्ट से ही मैं इस ब्लॉग पर पहली बार आई थी |

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