सिया राम के अतिशय प्यारे, अंजनिसूत मारुती दुलारे,
श्री हनुमान जी महाराज
के दासानुदास श्री राम परिवार द्वारा
पिछले अर्ध शतक से अनवरत प्रस्तुत यह

हनुमान चालीसा

बार बार सुनिए , साथ में गाइए ,
हनुमत कृपा पाइए .

[शब्द एवं धुन यहीं उपलब्ध हैं]

प्रार्थी - "भोला" [ श्री राम परिवार का एक नगण्य सदस्य ]




आज का आलेख

शनिवार, 14 अप्रैल 2012

संगीत शिक्षा

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स्वर साधना 

हमारे एक नाती [ Grand Child ] ने हमारे " जय शिव संकर औघड दानी" वाले ब्लॉग को देखने के बाद ,निमानंकित टिप्पडी की  :- 
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जयसीताराम नाना जी और नानी जी,,

सादर प्रणाम एवं चरणस्पर्श, 
राम राम 
आपका  शिवशंकर जी वाला भजन सुना..बोहोत ही सुंदर प्रेरणादायक प्रस्तुति है आपकी! धन्यवाद ! हम ठीक हैं..और रियाज़ भी चल रहा है थोडा थोडा.., एक समस्या है..जब हम ऊँचे सुर में होते हैं ..तो आवाज़ पे उतना control नहीं आता और vibration भी स्वयं आ जाती है..क्या करूं..?  नीचे सुर में अगर उसको गायें..तो मज़ा नहीं आता. .guide करिए. 
 
===================================================.
यह सोंच कर कि उसकी टिप्पडी केवल मेरे भजन के शब्दों के विषय में है , मैंने उसे निम्नांकित  उत्तर दिया :-
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राम राम बेटा , यदि ब्लॉग में "स्माइली"  दिखा सकता तों वास्तविकता समझ में आती ! ये तों बताओ उत्तर कि  भजन सुन पाये या नहीं ? कृपया इस मेल के नीचे हमारे ब्लॉग का जो लिंक  दिया है , वहाँ क्लिक करो तों असली ब्लॉग खुल जायेगा और हमारे उस भजन का वीडियो भी तुम देख सकोगे ! एमेच्योर रेकोर्डिंग है , त्रुटियाँ हैं , --उन्हें इग्नोर करना ! तुम्हारा रिराज़ कैसा चल रहा है ? खाली समय का रियाज़ से अच्छा उपयोग और कोई नहीं है ! तुम सब खुश रहो ! रियाज़ के द्वारा भक्ति करो , और स्वर से ईश्वर को पा लो ! --- भोला नाना 

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उपरोक्त पत्र के साथ ही मैंने निम्नांकित पत्र भी प्रेषित किया :
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राजा बेटा ,राम राम  , "NO BIG PROBLEM "

जब १९५० के दशक में २०-२२  वर्ष की अवस्था में मैं ,अपनी छोटी बहन माधुरी को  जो तब १६ वर्ष की ही थीं ,आकाशवाणी लखनऊ में सुगम संगीत का प्रोग्राम कराने ले जाता था मेरी भेंट अपनी ही उम्र के एक उभरते शाष्त्रीय गायक  गुलाम मुस्तफा खां से हुई !  वह यू.पी के एक मशहूर संगीत घराने के हैं और आज वह पद्म भूषण से विभूषित हैं ! उन् दिनों १९५०-६० में हम अक्सर रेडियो स्टेशन पर मिलते थे ! 

मैंने एकबार गुलाम मुस्तफा साहेब से यही प्रश्न किया जो तुमने मुझसे आज पूछा है ! बात यह थी कि उस जमाने में सभी लडकियां "लता" ,और पुरुष "रफी" बनना चाहते थे ! माधुरी और मैं, हम दोनों भी इस रोग के  शिकार थे ! 

मुस्तफा साहेब ने जो नुस्खा दिया अगले पत्र में भेजूंगा ,  after knowing from you that you are seriously interested .गुरु मंत्र है ऐसे नहीं दिया जाता जब तक मन्त्र लेने वाला पूरी तरह तैयार न हो ! वैसे आज के लिए थक भी गया हूँ . More on hearing from U 
God Bless all of U  , 
LOVE
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मेरे उपरोक्त पत्र के उत्तर में उसने कहा :-
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"जी नानाजी , हम तैयार हैं..सुनने के लिए..आप  बताइए.". 
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शेष आगे के अंकों में 

निवेदक : व्ही . एन   .श्रीवास्तव "भोला"
सहयोग : श्रीमती कृष्णा भोला श्रीवास्तव
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