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रविवार, 6 अगस्त 2023


निज गृह की बगिया   में  खिले  सुमनों की प्राकृतिक सुंदरता  में परम सत्य के दर्शन के भाव से ध्वनित गीत----------------

 ये हरियाली ये विविध रंग 

ये चपल पवन ये जलतरंग ॥

ये दृष्य सभी नयनाभिराम ।

हर  शय मेँ दीखे राम राम ॥

राम राम राम राम राम राम राम बस राम ..॥


ये स्वर्णिम दिनकर तेजवान

चंदा।  मामा अति रूपवान ॥

ऊर्जा करता  है   रयि प्रदान 

शीतलता शशि का है सुदान ॥

शशि रवि दोनौँ कर रहे गान

राम राम राम राम राम राम राम बस राम...॥


ये हरित धरनि   ये नील गगन

बहुरंगी   यै   सुंदर उपवन

है डोल रही मदमस्त पवन

पूरी   फुलवारी झूम झूम ,

कर रही मगन हो नाम जपन ।

राम राम राम राम राम राम राम बस राम  ॥

अमृत  बरसाते मेघ सघन

पुलकित होता धरती का तन ।

भर गये    सभी  सूखे पलवल

नदियोँ  का जल करता कलकल

कलकल मेँ गूँजे   राम नाम

राम राम राम राम राम राम राम बस ...॥

राम राम बस राम राम बस राम राम ।


ये हरित धरनि यै नील गगन

स्वच्छंद बिहररते बिहंग  मगन

कलरव मेँ  करते नाम   जपन.

स्वच्छंद बिहरते बिहंग। मगन

राम राम राम राम  राम राम राम बस

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शब्द और स्वर संयोजक एवं गायक श्री व्ही एन श्रीवास्तव :भोला"

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निज गृह की बगिया में खिले सुमनों की प्राकृतिक सुंदरता में परम सत्य के दर्शन के भाव से ध्वनित गीत
निज गृह की बगिया में खिले सुमनों की प्राकृतिक सुंदरता में परम सत्य के दर्शन के भाव से ध्वनित गीत