विशिष्ट पोस्ट

मेरा यह ब्लॉग - क्यों ?

मंगलवार, 10 मई 2022

मेरे वैद्य परमगुरु स्वामी

औषधि राम नाम की खाइये!
मृत्यु-जन्म के रोग मिटाइये!

(अमृतवाणी)


मेरे वैद्य परमगुरु स्वामी, 2005 में पहले हार्ट अटैक के समय, हौस्पिटल में स्ट्रेचर ट्राली से इमरजैंसी थियेटर में  प्रवेश करते समय ये शब्द स्वतः मन में स्फुरित हुए । कदाचित ऐडमिशन की लिखा पढी में किसी ने अभिभावक से रेफरिंग डौक्टर का नाम पूछा होगा और मेरे मन से यही उत्तर निकला ।

PUJYA SHREE SWAMI SATYANAND JI MAHARAJ

मेरे वैद्य परमगुरु स्वामी

तन के सारे रोग मिटावेँ
मन मेँ परमानंद बसावेँ
भय पीडायेँ दूर भगावेँ
गुरु मेरे विग्यानी !
!!टेक!!

भूत भविष सब जन के जानै
कष्ट भोग सबके अनुमाने
औषधि मूल सबै पहिचाने 
सतगुरु अंतरयामी !
!!टेक!!

कल क्या होगा किसे ग्यात है
जन्मोँ का प्रारब्ध साथ है
अगला पल श्री राम हाथ है
कहते ग्यानी ध्यानी !
!!टेक!!

जब रोगी थक हार बुलावै
रामबाण गुरुदेव चलावै
रोग लंकपति मार गिरावै
पल में सतगुरु स्वामी !
वैद्य परमगुरु स्वामी!

शब्द-स्वरकार गायक : श्री व्ही.एन श्रीवास्तव, भोला अंकलजी USA

रविवार, 8 मई 2022

मातृ दिवस

 प्रातः.प्रेरणा हुई, मदर्स डे  पर कुछ लिखूँ। लिखने बैठा, जो लिख पाया  प्रस्तुत है:


मैया, तुझ पर क्या लिक्खूँ क्या गाऊँ ?


कलम उठा कर कुछ लिखता हूँ , तेरा लेख नजर आता है ।

जब गाता हूँ तेरा ही स्वर, मेरे कानो में आता है । 

मैं तेरे ही बोल तुझे माँ, क्यों कर आज सुनाऊँ?

क्या लिक्खूँ क्या गाऊँ?


जब प्रतिबिंब लखूँ निज का छवि तेरी पड़े दिखाई ।

मंन्दिर की हर दैवमूर्ति में  जोत मात तव आई ।

तेरा अंश तुझी को मैया कैसे कहो चढाऊँ ?

क्या लिक्खूँ क्या गाऊँ?