गुरुवार, 18 दिसंबर 2025
बुधवार, 10 दिसंबर 2025
सोमवार, 8 दिसंबर 2025
एक सूफियानी गज़ल--जहां देखा तुझी को - देखा / रचना - "राद" / गायक -"भोला"...
स्वजनों | हम जीवात्माओं में ईश्वर की सी चेतनता . शुद्धता .निर्मलता सहजता और आनंद काआगार् विद्यमान है | खेद है की हम अपने ही इन गुणों से अनजान हैं| कॉश हम इस सत्य को जानते हुए अपने इन सद्गुणों का बर्तन करते हुए जीवन जीते |स्वजनों | हम जीवात्माओं में ईश्वर की सी चेतनता . शुद्धता .निर्मलता सहजता और आनंद काआगार् विद्यमान है | खेद है की हम अपने ही इन गुणों से अनजान हैं| कॉश हम इस सत्य को जानते हुए अपने इन सद्गुणों का बर्तन करते हुए जीवन जीते |
रविवार, 7 दिसंबर 2025
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