शुक्रवार, 16 जनवरी 2026
गुरुवार, 18 दिसंबर 2025
बुधवार, 10 दिसंबर 2025
सोमवार, 8 दिसंबर 2025
एक सूफियानी गज़ल--जहां देखा तुझी को - देखा / रचना - "राद" / गायक -"भोला"...
स्वजनों | हम जीवात्माओं में ईश्वर की सी चेतनता . शुद्धता .निर्मलता सहजता और आनंद काआगार् विद्यमान है | खेद है की हम अपने ही इन गुणों से अनजान हैं| कॉश हम इस सत्य को जानते हुए अपने इन सद्गुणों का बर्तन करते हुए जीवन जीते |स्वजनों | हम जीवात्माओं में ईश्वर की सी चेतनता . शुद्धता .निर्मलता सहजता और आनंद काआगार् विद्यमान है | खेद है की हम अपने ही इन गुणों से अनजान हैं| कॉश हम इस सत्य को जानते हुए अपने इन सद्गुणों का बर्तन करते हुए जीवन जीते |
रविवार, 7 दिसंबर 2025
शनिवार, 6 दिसंबर 2025
सोमवार, 3 नवंबर 2025
शनिवार, 1 नवंबर 2025
सोमवार, 20 अक्टूबर 2025
मेरे अतिशय प्रिय सभी स्वजन
जय श्रीराम
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दीपावली के इस मंगलमय शुभ पर्व पर
हमारी हार्दिक शुभ कामनाएं स्वीकारें
दक्षिण भारत में माँ के निम्नांकित आठ नाम अधिक प्रचिलित हैं :
१. आदि लक्ष्मी २. धान्य लक्ष्मी ३ .धैर्य लक्ष्मी ४. गज लक्ष्मी
५. सन्तान लक्ष्मी ६. विजय लक्ष्मी ७. विद्या लक्ष्मी ८. धन लक्ष्मी
माँ के नामों के उच्चारण में ही माँ के भिन्न गुण निहित हैं ! नाम ही उनके मंत्र हैं ! नाम के शब्दार्थ जानने वाले साधक माँ के नामों के ध्यान मात्र से उन गुणों के अधिकारी बन जायेंगे जिनकी उनकी वह नामधारी माँ अधिष्टात्री है !
माँ लक्ष्मी के ८ नामों में से "धन लक्ष्मी" को ही लीजिए : माँ "धन लक्ष्मी" की आराधना से , स्वधर्म समझ कर कर्म करने वाला साधक , निश्चित ही धनोपार्जन करेगा ! इसी प्रकार माँ के अन्य सभी नामों की उपासना करने वाले भी अपने अपने मन वांछित फल पा लेंगे !
प्रियजन ,
मेरी माने तो इस दीपावली ===,
मनमंदिर में ज्योति जगाकर , औरों के घर दीप जलाओ !!
जगमग दीप जगा कर चहुदिश ,निज पथ का तम दूर भगाओ !
निर्भय आगे बढ़ते जाओ , दीप जलाओ दीप जलाओ
गहन अँधेरे में जग डूबा , चहु दिसि उजियारा फैलाओ !
अपना घर चमका के प्रियजन , दुखी जनों के मन चमकाओ !!
उनके घर भी दीप जलाओ ,
दीप जलाओ ,दीप जलाओ !!
किसकी झुग्गी अन्धियारी है , कौन कहाँ है भूखा प्यासा ?
देवालय से पहिले ,प्रियजन उस दरिद्र को भोग लगाओ !!
उस भूखे की भूख मिटाओ ,
दीप जलाओ ,दीप जलाओ !!
'अर्थ' नहीं है फिर क्या ? अपना अंतर घट तो प्रेम भरा है !
अक्षय है वह , प्यारे तुम बस , वही 'प्रेमरस' पियो पिलाओ !!
स्वयम छको औ उन्हें छ्काओ ,
दीप जलाओ ,दीप जलाओ !!
तरस् रहें जो 'खील बताशे' को वे प्यारे प्यारे बच्चे !
बुझे हुए चेहरे ,जरजर तन वाले ये दुखियारे बच्चे !
फुटपाथों पर भटक रहे हैं जो अनाथ मनमारे बच्चे !
उनके मुखड़ों पर प्रियजन तुम प्यारे प्रभु का नूर खिलाओ !!
गुरुजन ने जो दिया "नामरस", स्वयम पियो औ उन्हें पिलाओ
प्रेम प्रीति की अलख जगाओ ,
दीप जलाओ , दीप जलाओ !!
क्रमशः
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निवेदक : व्ही. एन. श्रीवास्तव "भोला"
सहयोग: श्रीमती. कृष्णा भोला श्रीवास्तव
शनिवार, 27 सितंबर 2025
शुक्रवार, 26 सितंबर 2025
सोमवार, 22 सितंबर 2025
बुधवार, 27 अगस्त 2025
बुधवार, 6 अगस्त 2025
बुधवार, 9 जुलाई 2025
ओ मतवारे योगी - व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'
व्यास पूर्णिमा 2025 के अवसर पर
श्री राम शरणम् के गुरुजनों को
भजनांजलि
ओ मतवारे योगी, तुमने हमको दिव्य प्रकाश दिया।
नाम की ज्योति जगाई मन में, श्रद्धा और विश्वास दिया॥
ओ मतवारे योगी ......
अंधकार में भटक रहे थे, यहाँ वहाँ सिर पटक रहे थे।
अति दुलार कर, बाँह पकड़ कर, सत्य डगर पर डाल दिया॥
ओ मतवारे योगी .......
शरण हीन थे, अति मलीन थे, सत्कर्मो प्रति उदासीन थे।
महामंत्र दे राम नाम का, हम सबका उद्धार किया॥
ओ मतवारे योगी......
ओ मतवारे योगी, तुमने हमको दिव्य प्रकाश दिया।
नाम की ज्योति जगाई मन में, श्रद्धा और विश्वास दिया॥
परम गुरु जय जय राम
जय जय राम
शब्द-शिल्पी, स्वर-संयोजक, गायक - व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'
बुधवार, 11 जून 2025
गुरुवार, 15 मई 2025
जानकी जी के प्राकट्य उत्सव पर बधाई
राजा जनक राजधिराज के सभी गुणों के धनी है, ग्यानी हैं, ध्यानी हैं, धर्मशील हैं, संत स्वभाव है, पवित्र आचरण से युक्त हैं, प्रजापालक हैं, आसक्ति रहित होने से विदेह कहलाते हैं उनकी प्रजा सद्विवेकी है, सदाचारी है, सर्वगुण सम्पन्न है फिर भी उनके राज्य काल में ऐसी त्रासदीआई जिसने त्राहि त्राहि मचा दी । मिथिलेश नगरी में वर्षा नहीं हुई। भयंकर अकाल पड़ गया ।
महाराज विदेह ने अपने गुरुदेव शतानंद जी से विचार विमर्श किया कि इस समय क्या करें, कैसे इस त्रासदी से जनता जनार्दन को बचाये, कैसी जीव-जंतुओं की रक्षा करें ?
गुरुदेव ने कहा कि - आप कृषक की भाँति हल चलाएं, तो बरसात होगी, और अकाल से छुटकारा मिल जाएगा । इस समस्या का यही हल है ।
गुरुदेव के सुझाव को शिरोधार्य कर विदेह राजा जनक ने खेत में जा कर हल चलाया, तो हल चलाते हुए हल का फल घट से टकरा गया और धरनी से प्रगट हो गयी सीता मैया, जो जगत जननी हैं ।
जगजननी माँ के अवतरण पर कैसे कोई दुखी रह सकता है, कैसे कोई आपदा विपदा जान समूह को त्रासित कर सकती है ।
संत तुलसी दास की वाणी में --------
जनक सुता जग जननी जानकी ।
अतिसय प्रिय करुनानिधान की ।।
जगत माता जानकी जी के प्राकट्य उत्सव को दर्शाती यह बधाई प्रस्तुत है,
बाजे बाजे रे बधैया जनकपुरी में ।
जनकपुरी में, मिथलेश नगरी में ।
जनकसुता जगमात भवानी ।
प्रगटी घट विच धरनि उदर में ।
बाजे बाजे रे बधैया जनकपुरी में
समाचार नृप तुरत पठायो ।
रानी सुनयना अति हरषायो ।
तुरत गवैयन टेर बुलायो ।
आओ सब मिल नाचो गाओ ।
बाजे बाजे रे बधैया जनकपुरी में
जनकराज के मीत पुराने ।
बुढ़ऊ भोला भाट सयाने ।
गावन लागे नग्मे पुराने ।
आय गए रे नाचते गाते ।।
बाजे बाजे रे बधैया जनकपुरी में
शब्द-शिल्पी, स्वर संयोजक, गायक - व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'
सहयोगिनी - श्रीमती डॉ. कृष्णा श्रीवास्तव
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