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मंगलवार, 5 अप्रैल 2022

शांति करो माँ शांति करो

 हरवंशी भोलाबाबा द्वारा
इस नवरात्रि के तीसरे दिन रचित और आज माता को समर्पित


जय अंबे, जय जय दुर्गे,
दयामयी कल्याण करो।
शांति करो माँ, शांति करो माँ,
शांति करो माँ, शांति करो ।

कब से द्वार तिहारे ठारे,
बालक दीन दुखी बेचारे।
मैया, अब दो खोल किवाड़े,
दरशन दो और विपति हरो ॥
शांति करो माँ -------

त्रासदि ऐसी फैली है
माँ आज तेरे संसार में,
झुलस रही है मानवता
दैविक देहिक भवजार में,
आंचलतर शीतल बयार भर
जगती का संताप हरो ॥
शांति करो माँ -------

मरणासन्न सकल मानवता,
जीत रही बर्बर दानवता,
सत्यमेव जय मंत्र सत्य हो,
कर दो माँ वह पुण्य व्यवस्था,
त्रासदि मेट मनुज-मन में माँ
पुनः प्रीति संचार करो ॥
शांति करो माँ --------

ओम शांति शांति शांति ॥

भीतर शान्ति, बाहर शान्ति, सर्वत्र शान्ति ॥

रविवार, 3 अप्रैल 2022

सर्वेश्वरी जय जय जगदीश्वरी माँ

चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन के लिए मां का भजन



सर्वेश्वरी, जय जय जगदीश्वरी माँ

तेरा ही एक सहारा है
तेरी आंचल की छाहँ छोड़ 
अब नहीं कहीं निस्तारा है  
सर्वेश्वरी जय जय जगदीश्वरी माँ

मैं अधमाधम, तू अघहारिणी ! 
मैं पतित अशुभ, तू शुभकारिणी
हे ज्योतिपुंज, तूने मेरे 
मन का मेटा अंधियारा है !!
सर्वेश्वरी, जय जय जगदीश्वरी माँ

तेरी ममता पाकर किसने 
ना अपना भाग्य सराहा है
कोई भी खाली नहीं गया 
जो तेरे दर पर आया है !!
सर्वेश्वरी, जय जय जगदीश्वरी माँ

अति दुर्लभ मानव तन पाकर 
आये हैं हम इस धरती पर,
तेरी चौखट ना छोड़ेंगे,
अपना ये अंतिम द्वारा है !!
सर्वेश्वरी, जय जय जगदीश्वरी माँ


शुक्रवार, 1 अप्रैल 2022

मैया मुझे दरशन दो



विक्रम नव संवत्सर 2079 के आगमन की 
कोटिश बधाई और अनन्त मंगलकामनायें ॥

संवत दो हजार उन्यासी
मैरिमैक वैली के वासी ।
भोलाजी को गीत लिखाया
बाबा ने फिर उसे  गवाया ॥

चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस पर सद्गुरुत्रय की प्रेरणा से उपजी यह शब्द रचना:


मैया मुझे दरशन दो,
दरशन दो, दरशन दो ।

एक बार फिर मम अंतरघट
आनंद अमृत से भर दो।

मैया मुझे दरशन दो,
दरशन दो, दरशन दो ।

याद मुझे है कैसे इक दिन 
मैया तुमने भेज बुलाया
कोटिक भक्तों के आगे माँ
तुमने अपने पास बिठाया 
भरी सभा में उस दिन मैया
केवल मुझसे ही बतियाया ।
आज पुनः निज बालक को 
माँ गोदी ले उत्संग भरो ।

मैया मुझे दरशन दो,
दरशन दो, दरशन दो ।

वर्षों बाद पुनः जब मन में 
तव दर्शन की आस जगी
प्रगट हुईं तुम सहसा मैया
अमृत रस की झड़ी लगी ।
आज पुनः मम जगी पिपासा
को दरशन दे शांत करो ।

मैया मुझे दरशन दो,
दरशन दो, दरशन दो ।

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श्री श्री माँ आनंदमयी की कृपा एवं दर्शन का सौभाग्य कई बार प्राप्त हुआ। ये प्रसंग मैंने ब्लोग में पहले भी लिखे हैं। निम्न लिंक और इसकी शृखला में आगे के पोस्ट पढ़ें ।