सिया राम के अतिशय प्यारे, अंजनिसूत मारुती दुलारे,
श्री हनुमान जी महाराज
के दासानुदास श्री राम परिवार द्वारा
पिछले अर्ध शतक से अनवरत प्रस्तुत यह

हनुमान चालीसा

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प्रार्थी - "भोला" [ श्री राम परिवार का एक नगण्य सदस्य ]




आज का आलेख

मंगलवार, 19 अप्रैल 2011

महाराज जी की जयन्ती के अवसर पर उनके एक परम प्रिय शिष्य श्री जगन्नाथ प्रसाद श्रीवास्तव के पुत्र अतुल श्रीवास्तव का पत्र

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सभी परिवार जनों को यथा योग्य सादर चरण स्पर्श एवं राम राम

आज (दिनांक 18 अप्रेल 2011) परम पूज्य श्री स्वामी सत्यानन्द जी महाराज की 150 वीं जयन्ती एवं श्री हनुमान जयन्ती है. स्वामी जी महाराज का जन्म सन 1861 की चैत्र शुक्ल पूरणमासी के दिन प्रात: 5 बजे हुआ था. श्री हनुमान जी का जन्म भी प्रात: 5 बजे हुआ था. अतएव मेरी धारणा है कि स्वामी जी महाराज हनुमान जी के अवतार थे, जो कलियुग में हम सब को राम नाम का अति मीठा रस पिलाने के लिये अवतरित हुए थे. उनकी 150वीं जयंती की सबको बधाई. ईश्वर करे स्वामी जी महाराज का वरद हस्त हम सब के सिर पर सदा बना रहे. इस विशेष उत्सव पर हम सब अमृतवाणी का पाठ करेंगे और स्वामी जी महाराज के प्रिय भजन ‘राम अब स्नेह सुधा बरसा दे’, ‘दयामय मंगल मन्दिर खोलो’ आदि गायेंगे एवं जाप करेंगे.

2008 अप्रेल में स्वामी जी महाराज की कृपा से, हम लोग (सुनीता, स्तुति, अमित, छोटे से अथर्व करुणानिधान और मैं) डलहौज़ी गये थे. पूज्य स्वामी जी महाराज के जन्म दिन पर हम लोगों को ‘परम धाम’ में अमृतवाणी का पाठ करने का सुअवसर स्वामी जी महाराज की कृपा से मिला था. बहुत आनन्द आया था. कुछ भजन भी, जिनमें ऊपर लिखे हुए भजन भी थे, गाये थे.

11 वर्ष पूर्व आज ही के दिन, स्वामी जी महाराज के परम शिष्य - परम पूज्य बाबू चोला छोड़ कर पूज्य स्वामी जी महाराज में लीन हो गये थे. इस वर्ष हनुमान जयन्ति की हिन्दी एवं कलेंडर तिथियां वही हैं जो वर्ष 2000 में थीं – जब पूज्य बाबू स्वामी जी में लीन हो गये थे. बाबू ने अपना ऑपरेशन – अपने चित्त को राम नाम में लगाकर करवाया था. ऑपरेशन के लिये जाने से पहले उन्होंने अपने सारे भजन खूब जोर जोर से गाये थे. जो अंतिम भजन उन्होंने गाया था – वह था – “राम नाम लौ लागी” .

परम पूज्य स्वामी जी महाराज में लीन होने की यात्रा से पहले उन्होंने इस पृथ्वी लोक पर अपने ऊपर किये हुए उपकारों की ‘कृतज्ञता’ – भक्तिप्रकाश के ‘कृतज्ञता’ (पृष्ठ 102) को राधा से सुनकर की. ‘कृतज्ञता’ सुनते सुनते ही वे चोला छोड़कर चले गये थे. तो आइये, अपन सब भी आज अमृतवाणी के पाठ के बाद, भक्तिप्रकाश के ‘कृतज्ञता’ (पृष्ठ 102) को पढ़ें.

कृतज्ञता

उसका रहूँ कृतज्ञ मैं, मानूँ अति आभार; जिसने अति हित प्रेम से, मुझ पर कर उपकार .1. 
 दिया दीवा सुदीपता, परम दिव्य हरि नाम; पड़ी सूझ निज रूप की, जिससे सुधरे काम .2.
कर्म धर्म का बोध दे, जिसने बताया राम; उस के चरण सरोज पर, नत शिर हो प्रणाम .3.
धन्यवाद उस सुजन का, करूं आदर सम्मान; जिसने आत्मबोध का, दिया मुझे शुभ ज्ञान .4.
उस के गुण उपकार का, पा सकूं नहीं पार; रोम रोम कृतज्ञ हो, करे सुधन्य पुकार .5.
उस के द्वार कुटीर पर, मैं दूं तन सिर वार; नमस्कार बहु मान से करूं मैं बारम्बार .6.
बहते जन को पोत शुभ, दिया नाम का जाप; शब्द शरण को दान कर, नष्ट किये सब पाप .7. 
उस ने जड़ी सुनाम दे, हरे जन्म के रोग; संशय भ्रान्ति दूर कर, हरे मरण के सोग .8.
चिन्तामणि हरि नाम दे, चिन्ता की चकचूर; दिया चित्त को चांदना, चंचलता कर दूर .9.
वारे जाऊँ सन्त के, जो देवे शुभ नाम; बाँह पकड़ सुस्थिर करे, राम बतावे धाम .10. 
सत्संगति के लाभ से, ऐसा बने बनाव; रंग बहुत गूढ़ा चढ़े, बढ़े चौगुणा चाव .11.

कुछ वर्ष पूर्व मैं जब जयपुर गया था, तब अपनी बहन (बिशन मौसी की पुत्री) सुषमा के घर भी गया था. सुषमा के पति श्री शेखर हैं. वे बहुत अच्छे क्लासिकल सिंगर हैं एवं भजनों के कार्यक्रम रेडिओ आदि पर देते हैं. उन्होंने बताया था कि पूज्य बाबू ने उन्हें एक भजन लिखकर उसकी राग बनाने को दी थी. उस विज़िट में हम लोग उनसे वह भजन नहीं सुन पाये थे. परन्तु, जब इस वर्ष होली पर जयपुर गये थे, तब श्री शेखर से वह भजन सुना था. उस भजन के बोल हैं “प्रभु को बिसार किसकी आराधना करूं मैं

यह भजन मैने टेप कर लिया था. आप सब को आनन्द लेने के लिये यह भजन मैं संलग्न कर रहा हूं


प्रभु को बिसार  किसकी आराधना करूं मैं .  
पा कल्पतरु किसीसे क्या याचना करूं मैं ..

मोती मिला जो मुझको मानस के मानसर में .  
कंकड़ बटोरने की  क्या चाहना करूं मैं ..

प्रभु को बिसार  किसकी आराधना करूं मैं .  
पा कल्पतरु किसीसे क्या याचना करूं मैं ..

सबका परमपिता जब घट घट में बस रहा है;
लघु जान क्यों किसीकी अवहेलना करूँ मैं.

प्रभु को बिसार  किसकी आराधना करूं मैं .  
पा कल्पतरु किसीसे क्या याचना करूं मैं ..

मुझको प्रकाश प्रतिपल  आनंद आंतरिक है .  
जग के अधिक सुखों की  क्या कामना करूं मैं ..

प्रभु को बिसार  किसकी आराधना करूं मैं .  
पा कल्पतरु किसीसे क्या याचना करूं मैं ..




श्री राम शरणम वयं प्रपन्ना: ; प्रसीद देवेश जगन्निवासत

आप सबका
अतुल

3 टिप्‍पणियां:

  1. पूजनीय महाराज जी के विषय में जानकारी देने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद .

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  2. काकाजी प्रणाम बहुत सुन्दर लगा पूजनीय स्वामीजी के बारे में जान कर !

    उत्तर देंहटाएं
  3. shikha ji
    shaw ji
    धन्यवाद , सदगुरु तथा इष्टदेव की चर्चा स्व्मेव् ही मधुर होती है और पवित्र हृदय उसे सहजता से ग्रहन कर लेते हैं । श्री राम कृपा आप पर सदा बनी रहे .

    उत्तर देंहटाएं

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