सिया राम के अतिशय प्यारे, अंजनिसूत मारुती दुलारे,
श्री हनुमान जी महाराज
के दासानुदास श्री राम परिवार द्वारा
पिछले अर्ध शतक से अनवरत प्रस्तुत यह

हनुमान चालीसा

बार बार सुनिए , साथ में गाइए ,
हनुमत कृपा पाइए .

[शब्द एवं धुन यहीं उपलब्ध हैं]

प्रार्थी - "भोला" [ श्री राम परिवार का एक नगण्य सदस्य ]




आज का आलेख

शनिवार, 13 नवंबर 2010

JAI JAI JAI KAPISUR # 2 1 8

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हनुमत कृपा
अनुभव  

आइना ये तो बताता है  मैं  क्या  हूँ   लेकिन 
आइना  ये नहीं कहता ,   कि कौन है मुझमें  (नूर)
About ourselves - we know only as much as is reflected in the mirror.The mirror does not show the ONE who hides within us - ONE who drives us and steers us
through the maize of this life.

जीव अपने विषय में उतना ही जानता हैं जितना वह आईने में दिखता है या जितना आस पास के जीव उसको बाहर से जाँच कर उसे बताते हैं ! जीव के अन्तर में छुपा बैठा वह "परम उदार-कृपालु " Navigator जो उसे ------टोक देता है कदम जब भी गलत उठता है
दुर्भाग्यवश जीव उसे पहचानता ही नहीं  !

सोलह वर्ष के बड़े भैया के आईने में जो दिखाई दिया उसके अनुसार उन्होंने अपने भविष्य की योजना बनायी और उनके गुरुजनों को उस परिस्थिति में जो अनुकूल लगा उन्होंने वैसा ही किया ! वैसी व्यवस्था की गयी जिससे भैया को उनका मनवांछित फल मिल जाये ! पर भैया के अंतर में बैठे उस "सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान"  के "मास्टर प्लान" में उनके लिए क्या था वह न तो भैया जानते थे और न उनके मानवीय शुभचिंतक !

बड़े भैया के संकल्प - सिद्धि के आसार बम्बई पहुँचते ही नजर आने लगे ! उन दिनों प्रसिद्ध फिल्म निर्माता "व्ही.शांताराम जी" अपनी नयी फिल्म "शकुन्तला" के लिए कलाकारों का चयन कर रहे थे ! ऐतिहासिक और धार्मिक चित्रों के उस जमाने के हीरो "साहू मोदक" "चन्द्रमोहन","प्रेम अदीब", "अरूण" (आज के हीरो "गोविंदा" के पिता) आदि से कहीं अधिक प्रभावशाली व्यक्तित्व और आकर्षक स्वरूप वाले भइया अपनी सुंदर गायकी और हिन्दी भाषा के शुद्ध उच्चारण के कारण पहले ही साक्षात्कार में बाजी मार ले गये और शांताराम जी ने उन्हें "शकुन्तला" में भाग लेने के लिए स्वीकार कर लिया !

बम्बई से तार आया ! कानपुर का सूटरगंज वाला घर "लाल विला" खुशिशों से भर गया ! गंगातट के "हनुमानजी" और " भोले बाबा " के मंदिर में श्रद्धा सहित प्रसाद चढ़ाया गया और बड़े प्रेम से मोहल्ले के घर घर में वितरित किया गया ! जितनी खुशी ह्म लोगों ने मनायी उतनी खुशी तो शायद ,१७ वर्ष पूर्व ,भैया के (12 years belated) जन्म दिन पर भी नही मनाई गई होगी ! (प्रियजन ,ह्म यह बात गारंटी से तो नहीं कह सकते  क्योंकि ह्म तो भैया के जन्म के ५ वर्ष बाद पैदा हुए थे)

निर्माता निर्देशक ने फिल्म की मुहूर्त के लिए दुर्गापूजा वाली नवरात्री की सप्तमी तिथि का  निश्चय लिया ! तैयारियां जोर शोर से चल पड़ी! स्क्रिप्ट , डायलोग, वेशभूषा  तथा सेट डिज़ाइन पर युद्ध स्तर से काम होने लगा ! और तभी------------- क्रमशः

निवेदक:  व्ही. एन. श्रीवास्तव "भोला"
78, Clinton Road ,BROOKLINE  (MA -02445 , USA)


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