सिया राम के अतिशय प्यारे, अंजनिसूत मारुती दुलारे,
श्री हनुमान जी महाराज
के दासानुदास श्री राम परिवार द्वारा
पिछले अर्ध शतक से अनवरत प्रस्तुत यह

हनुमान चालीसा

बार बार सुनिए , साथ में गाइए ,
हनुमत कृपा पाइए .

[शब्द एवं धुन यहीं उपलब्ध हैं]

प्रार्थी - "भोला" [ श्री राम परिवार का एक नगण्य सदस्य ]




आज का आलेख

मंगलवार, 14 दिसंबर 2010

JAI JAI JAI KAPISUR # 2 4 0

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हनुमत कृपा 
अनुभव  
(गतांक से आगे )


मुझे  पूरा विश्वास है प्रियजन क़ि आप अमेरिकन बच्चों  द्वारा पूछे  हुए  हिन्दुओं  के आराध्य देव श्रीकृष्ण और श्रीराम की तथाकथित अनुचित लीलाओं से संबंधित प्रश्नों के उचित उत्तर अवश्य जानते हैं ! अपने विषय में तो मैं कह ही चुका हूँ क़ि  आज से आठ दस वर्ष पूर्व जब वे  प्रश्न मेरे समक्ष आये थे मैं उत्तर देने में असमर्थ था ! मैं बच्चों की शंकाओं का समाधान नहीं कर पाया था ! पर विगत वर्षों में मुझ पर श्री हरि कृपा हुई ,और मुझे आप से आप उन सभी प्रश्नों के उत्तर मिल गये ! जी हाँ "हनुमत कृपा" से ! 


बात ऎसी हुई कि यहाँ अमेरिका आने के कुछ वर्ष बाद मुझे हृदय रोग हुआ !गहन मेडिकल जांच के बाद शरीर के विभिन्न अंगों के रोगों का निदान हुआ और मुझे हर प्रकार के शारीरिक श्रम करने की मनाही हो गयी ! प्रति दिन , २०-३० मिनट मंथर गति से टहलने के अतिरिक्त और कुछ करने की न शक्ति मुझमे थी और न मुझे उसकी इजाजत थी  ! इत्तेफाक से धर्मपत्नी कृष्णा जी का भी उन्ही दिनों एक गम्भीर ओपरेशन हुआ और वह भी हमारी तरह " पूर्ण विश्राम" करने की अधिकारिणी बन गयी ! बस क्या था ,अपने को तो मज़ा आ गया ! चौबीसों घंटे केवल मैं और वह , जरा सोच के देखिये "क्या खूब गुज़री होगी जब मिले  दीवाने दो "  


ऐसे में समय बिताने के लिए अन्ताक्षरी का सहारा लेना पड़ा ! ह्म शुरू करते १९३४ -३५ की "अछूत कन्या"- में देविकारानी और अशोक कुमार के गीत "मैं बन की चिड़िया बन के बन बन डोलूँ रे " से और कृष्णा जी "रा" से "सरस्वती चन्द्र" का गीत "राम करे ऐसा हो जाये , मेरी निदिया तोहे मिल जाये " गाकर मुझे "ये" से गाने को मजबूर करतीं और मैं "ये रातें ये मौसम ये हसना हसाना , हमे भूल जाना इन्हें ना भुलाना " गाता और उसके   साथ ही फिर झगड़ा शुरू हो जाता ! इन्साफ करने वाले (आज कल के बालकगण)कहते "ऐसा कोई फिल्मी गाना नहीं " और मेजोरिटी के बल पर वे मुझे हरा देते !बहुत दिनों तक यह खेल भी न चल सका , किसी और "टाइम पास विधि" की तलाश शुरू हुई !


कुछ और इंट्रेस्टिंग नहीं मिला तो मजबूरन टी वी पर "आस्था" चैनल देखने का समय  आप से आप बढ़ गया ! सच पूछिए तो "आस्था" चैनेल पर श्री मोरारी बापू, श्री रमेश भाई    ओज़ा आदि के प्रवचन सुन कर हमारी रूचि श्रीमदभागवत ,एवं रामायण के प्रति दिन पर दिन बढने लगी ! उनकी प्रेरणा से  ह्म दोनों का अधिक समय स्वाध्याय में बीतने लगा ! मेरी ऑंखें बीमारिओं के कारण कमजोर हो गयी  थीं इस कारण  धर्मपत्नी कृष्णा जी मुझे श्रीमद भागवत, राम चरित मानस ,श्री  भगवत गीता और ह्मारे सद्गुरु स्वामी सत्यानन्द जी महराज द्वारा रचित विभिन्न ग्रंथों को पढ़ कर  सुनाने लगीं ! इसी स्वाध्याय के द्वारा हमे श्री मदभागवत के दशम स्कन्ध के पाठ से उन अमेरिकी बच्चों की सभी "श्री कृष्ण" सम्बन्धी शंकाओं के समाधान एवं प्रश्नों के उत्तर मिल गये ! चलिए आपको भी बता दूं जो थोड़ा बहुत मुझे अभी भी याद है, इसी बहाने मेरा रिवीजन भी हो जायेगा ! मैं उसी क्रम में उत्तर दे रहा हूँ जिस क्रम में बच्चों ने प्रश्न पूछे  थे !    
  • (a) श्रीकृष्ण के माखन चोरी का उद्देश्य :बालक कृष्ण परमार्थ हेतु मक्खन चुराते थे !  अत्याचारी राजा कंस को टेक्स स्वरूप गोकुल का सारा मकखन पहुचाने के बजाय वही मकखन निर्धन  ग्वालों के भूखे बच्चों को खिला देना उन्हें उचित लगता था  !
  • (b)  यमुना तट पर गोपियों के वस्त्र छुपाने का उद्देश्य  :-गोपियाँ यमुना में नग्न स्नान करके शास्त्रीय मर्यादा भंग कर रहीं थीं !अस्तु  ६ से ६० वर्ष के आयु की उन गोपियों के अहंकार तथा उनकी बुद्धिगत दुर्वासनाओं को मिटाने के उद्देश्य से बालक कृष्ण ने ९  वर्ष की आयु में यह लीला की थी ! भ्रान्ति पूर्ण होगा यह सोचना कि इस लीला में काम भावना का कोई  प्रश्न भी है ! बाल कृष्ण की  चीरहरण लीला में वस्त्र  वासना स्वरूप आवरण का प्रतीक है जो जीव और ईश्वर के मिलन में बाधा डालता है  ( श्रीमद भागवत-दशम स्कन्ध -अध्याय २२-श्लोक २१ ) !
---------------आज इतना ही ,अन्य प्रश्नों के उत्तर ,क्रमश आगे के अंकों में :
 
निवेदक :- व्ही. एन. श्रीवास्तव "भोला"

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