सिया राम के अतिशय प्यारे, अंजनिसूत मारुती दुलारे,
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के दासानुदास श्री राम परिवार द्वारा
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प्रार्थी - "भोला" [ श्री राम परिवार का एक नगण्य सदस्य ]




आज का आलेख

रविवार, 4 जुलाई 2010

FAITH & SELF CONFIDENCE

Print Friendly and PDF विश्वास-खुद और खुदा पर  

मनुष्य को यदि अपने ऊपर विश्वास हो ,जगत पर विश्वास हो ,सर्वशक्तिमान प्रभु पर विश्वास हो तो वह  जीवन में उन्नतिं के उच्चतम शिखर पर पहुँच सकता  है .विश्वासी क़ी आत्मा सजीव होती है. वह आशा पूर्ण जीवन जीता है ,वह निराश नहीं होता . जहाँ विश्वास है वहाँ दृढ़ता ,धैर्य ,संयम .और आत्मबल हैं . किसानो को पूर्ण  विश्वास होता है क़ी बीज बोया है तो उगेगा ही. शर्त यह है क़ी ये विश्वास विवेकपूर्ण हो सत्य से आवृत हो,प्रेम से पूरित हो तथा त्याग क़ी छाया में हो. कोरा अंधविश्वास न हो. 


एक अच्छा डाक्टर किसी रोगी का इलाज तभी प्रारम्भ करता है जब उसे विश्वास हो जाता है क़ी जो ओषधि वह रोगी को देगा उस से वह रोगी स्वस्थ हो जायेगा .रोगी भी उन्ही वैद्यों के पास इलाज के लिए जाते हैं जिन पर उन्हें विश्वास रहता है क़ी जिसके उपचार से वह ठीक हो जायेगा वैद्य और रोगी के इस आपसी विश्वास एवं अनुशासित खान पान, आचार-व्यवहार  से अधिकांश रोगी स्वस्थ हो जाते हैं इससे .   स्पष्ट है क़ी विश्वासी व्यक्ति धैर्य के साथ सफलता क़ी प्रतीक्षा करता है और चिंता मुक्त रहता है



आदरणीय बाबू (माननीय चीफ जस्टिस शिव दयाल जी ) कहा करते थे क़ी विश्वास की नीवं पर ही  कर्तव्यशील वीरों की सफलता  की मीनार खड़ी होती है..आत्म विश्वास एवं हरि-कृपा में विश्वास से व्यक्तियों को  शरणागती प्राप्त होती है और शरणागत वीर कभी पराजित नह़ी होता. महाभारत में पार्थ  (अर्जुन).श्री कृष्ण की शरण में जा कर ही विजयी हुआ.शरणागत पथ के विषय में वह कहते थे की:- --
"यह पथ है विश्वास और कर्त्तव्य परायनता का ,सत्य और न्याय का ,अहिंसा और सेवा का ,निर्मलता और संयम का ,सरलता और विनम्रता का .महात्मा गांधी और राजेन्द्र बाबू इसी पथपर चल कर अपने युग के महानतम पुरुष हुए औरआने वाली पीढ़ियों के उत्थान के लिए इतिहास में अपने अमिट पदचिन्ह छोड़ गये "


ब्रह्मलीन  स्वामी सत्यानन्द जी महाराज ने भी कहा है 'गांधीजी की पीठ में इतना बल नहीं था जितना उनमें विश्वास था .विश्वास क़ी कितनी बड़ी सत्ता है क़ी ब्रिटिश गवर्नमैंट जैसे शक्तिशाली चले गये "  अटल विश्वास के धनी ,एक अति निरधन परिवार में जन्मे  भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी बचपन में ,अपने गाँव से कोसो दूर ,रास्ते में एक नदी को तैर कर पार करके शिक्षा पाने के लिए पाठशाला जाते थे.उस छोटे से,निर्बल दिखने वाले महा मानव  ने अपने देश के हित में जो गौरव पूर्ण कार्य किये युगों युगों तक वे विश्व को याद रहेंगे.


विश्वास से प्रतिकूल परिस्थिति को अनुकूल बनाइए अपना अपने आप पर तथा अपने इष्ट पर का विश्वास किसी भी कीमत पर कम न होने दीजिये.आइये स्वामी जी के शब्दों में प्यारे.प्रभु से प्रार्थना करें.
         
सर्व शक्तिमय  रामजी अखिल विश्व के नाथ 
शुचिता सत्य सुविश्वास दे सर पर रख कर हाथ 


निवेदक:   व्ही. एन. श्रीवास्तव "भोला"

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